नई दिल्ली. बॉलीवुड का एक गाना है… कितने भी तू कर ले सितम, हंस-हंस के सहेंगे हम, ये प्यार न होगा कम… क्रिकेट से श्रीलंका के पूर्व सलामी बल्लेबाज जयसूर्या का नाता भी कुछ ऐसा है कि इसके लिए वो हर सितम सहने को तैयार हैं. फिर चाहे वो ICC का लगाया बैन ही क्यों न हो. क्रिकेट में जयसूर्या की पहचान वनडे खेलने का अंदाज बदलने वाले और इस फॉर्मेट में क्रांति लाने वाले क्रिकेटर की है. 90 के दशक में जयसूर्या ने दुनिया को दिखाया कि वनडे क्रिकेट में पहले 15 ओवरों को रोमांचक कैसे बनाया जा सकता है. हालांकि, जब भ्रष्टाचार को लेकर जयसूर्या का नाम सामने आया तो ICC ने उन पर एक्शन लेने में कोई कोताही नहीं बरती.

क्रिकेट से है प्यार, बैन स्वीकार- जयसूर्या

ICC ने भ्रष्टाचार निरोधक जांच में अड़चन डालने के लिये जयसूर्या पर 2 साल का बैन लगाया है. लेकिन, जयसूर्या ने अपने ऊपर लगाए ICC के बैन को बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि बस क्रिकेट से प्यार है इसलिए वो इस बैन को स्वीकार कर रहे हैं. ICC के पास उनके खिलाफ ‘भ्रष्टाचार, सट्टेबाजी या आंतरिक सूचना के दुरूपयोग’ कोई सबूत नहीं है. ये प्रतिबंध सही मायनों में दुर्भाग्यपूर्ण है.

इन मामलों में लगा बैन

बता दें कि श्रीलंकाई क्रिकेट में बड़े स्तर पर फैले भ्रष्टाचार की ICC की जांच के दौरान जयसूर्या से पूछताछ की गयी थी. उन्हें आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.4.6 और 2.4.7 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है. इसमें अनुच्छेद 2.4.6 ‘‘बिना किसी उचित कारण के एसीयू की किसी जांच में सहयोग नहीं करना या उसमें नाकाम रहने’ तथा अनुच्छेद 2.4.7 ‘‘एसीयू की किसी जांच में देरी या बाधा पहुंचाने ’’ से संबंधित हैं.

‘मेरे लिए देश और क्रिकेट पहले रहा’

जयसूर्या ने कहा कि उन्होंने हमेशा उच्च मानदंडों के साथ यह खेल खेला. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हमेशा देश को सबसे पहले रखा और क्रिकेट प्रेमी जनता इसका गवाह रही है. मैं श्रीलंका की जनता और अपने प्रशंसकों का आभार व्यक्त करता हूं जो इस मुश्किल दौर में मेरे साथ खड़ी है.’’ बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में जयसूर्या ने 21000 से भी ज्यादा रन बनाए हैं.