कोलकाता: इंटरनेशनल क्रिकेट में टॉस हटाए जाने की चर्चा के बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने सोमवार को कहा कि वह मैच से टॉस को हटाने के पक्ष में नहीं है. इस मुद्दे पर आईसीसी क्रिकेट समिति अगले हफ्ते मुंबई में होने वाली बैठक में चर्चा करेगी. गांगुली ने ईडन गार्डन्स में पत्रकारों से कहा, ‘‘यह देखना बाकी है कि इसे लागू किया जाता है या नहीं, निजी तौर पर मैं टॉस हटाने के पक्ष में नहीं हूं.’’

सिक्के से टास करने की परंपरा 1877 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए पहले टेस्ट मैच से चली आ रही है. टॉस जीतने वाली टीम यह फैसला करती है कि उसे पहले बल्लेबाजी करनी है या गेंदबाजी. जिसमें घरेलू टीम का कप्तान सिक्के को उछालता है जबकि दूसरी टीम का कप्तान अपनी पसंद के बारे में बोलता है.

हाल के दिनों में हालांकि इसकी आलोचना हुई है क्योंकि टॉस जीतने पर घरेलू टीम को काफी फायदा होते देखा गया है. गांगुली ने कहा, ‘‘अगर घरेलू टीम टॉस हार जाती है तो उसे फायदा नहीं मिलता है.’’ आलोचकों का कहना है कि इस परंपरा के कारण मेजबान टीमों को अनुचित लाभ मिलता है. इसपर पिछले दिनों जारी एक पत्र में कहा गया था कि टेस्ट मैच में पिच की तैयारी में घरेलू टीम के हस्तक्षेप के वर्तमान स्तर को लेकर गंभीर चिंता है और समिति के एक से अधिक सदस्यों का मानना है कि प्रत्येक मैच में मेहमान टीम को टॉस पर फैसला करने का अधिकार दिया जाना चाहिए. हालांकि समिति में कुछ अन्य सदस्य भी हैं जिन्होंने अपने विचार व्यक्त नहीं किए.

काउंटी चैंपियनशिप में 2016 में टॉस नहीं किया गया और यहां तक कि भारत में भी घरेलू स्तर पर इसे हटाने का प्रस्ताव आया था लेकिन उसे नकार दिया गया था. इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने दावा किया कि इस कदम के बाद मैच लंबे चले और बल्ले और गेंद के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली.