8 जुलाई 1972 को कोलकाता में जन्मे सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे स्टाइलिश बाएं हाथ के बल्लेबाज और सफल कप्तान रहे लेकिन उनका करियर विवादों से बच नहीं पाया। चाहे टॉस के लिए विपक्षी कप्तानों को इंतजार करवाने का किस्सा हो या ग्रेग चैपल के साथ मतभेद, गांगुली को बेशक भारतीय टीम का सबसे विवादास्पद कप्तान कहा जा सकता है। Also Read - नेहरा जी के वचन: IPL धोनी के लिए टीम इंडिया में वापसी का मापदंड नहीं हो सकता

1988-89 के रणजी ट्रॉफी सीजन के दौरान दिल्ली के खिलाफ खेले गए फाइनल मैच में गांगुली ने अपनी प्रथम श्रेणी डेब्यू किया था। 17 साल के एक खिलाड़ी को इतने बड़े मैच में डेब्यू कराने का फैसला क्रिकेट समीक्षकों के गले नहीं उतरा। इसके बावजूद सौरव अपने भाई स्नेहाशीष की जगह बंगाल टीम में शामिल हुए। मात्र 20 रन पर 2 विकेट गिरने के बाद गांगुली क्रीज पर उतरे ने 22 रनों की पारी खेली थी लेकिन अरुण लाल की मैचविनिंग पारी के आगे फैंस गांगुली को भूल गए। लेकिन जल्द ही उस बल्लेबाज ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया। Also Read - 'राहुल द्रविड़ के उस एक ई-मेल ने मेरी जिंदगी बदल दी, तब से मेरे सामने एक नई दुनिया थी'

अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज

सौरव ने 1992 के विश्व कप में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के साथ टीम इंडिया में कदम रखा था लेकिन यहां भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। गांगुली के डेब्यू के बाद ये अफवाहें शुरू हो गई कि बंगाल का ये क्रिकेटर टीम के सीनियर खिलाड़ियों की बात नहीं मानता है। वहीं एक अफवाह ये भी थी कि गांगुली ने 12वां खिलाड़ी बन पानी लेने जाने से साफ इंकार कर दिया था। लेकिन सौरव ने कभी भी इसे अपने खेल पर प्रभावित नहीं होने दिया। Also Read - शाहिद आफरीदी के पसंदीदा बल्लेबाज हैं विराट कोहली-रोहित शर्मा, जानिए पूरी डिटेल

वनडे टीम में जगह बनाने के चार बाद 1996 के इंग्लैंड दौरे पर गांगुली ने लॉर्ड्स के मैदान पर शतक जड़ कर बता दिया कि वो किस कद के खिलाड़ी हैं। गांगुली ने भारत के लिए खेले 113 टेस्ट मैचों में 51.25 की शानदार औसत से 7,212 रन बनाए। जबकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 254 मैचों में 15,687 रन बनाए। वनडे क्रिकेट की बात करें तो गांगुली के नाम 311 मैचों में 11,363 रन हैं, जिसमें 22 शतक और 72 अर्धशतक शामिल हैं।

फैब फाइव का हिस्सा

सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और वीरेंदर सहवाग के साथ गांगुली भारतीय टीम के फैब फाइव का हिस्सा थे। गांगुली उन तीन ऑलराउंडर खिलाड़ियों (युवराज सिंह और क्रिस गेल के अलावा) में से एक हैं, जिन्होंने एक ही वनडे मैच में 50 रन बनाकर और विकेट लिए और एक ही मैच में 100 रन बनाकर और चार विकेट झटके। तेंदुलकर और जयसूर्या के अलावा वो 20 शतक लगाकर दो पांच विकेट हॉल लेने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं।

कप्तानी की शुरुआत

गांगुली ने बतौर कप्तान वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में डेब्यू किया था। टीम इंडिया ने ये सीरीज 2-1 से जीती थी। जिसके बाद गांगुली टीम के लीडरशिप ग्रुप का हिस्सा बने और उन्हें सचिन तेंदुलकर का उपकप्तान बनाया गया। और फिर तेंदुलकर के इस्तीफा देने के बाद गांगुली ने टीम की कमान संभाली।

कप्तान बनने के बाद गांगुली की पहला बड़ा टूर्नामेंट था 1999-2000 में शारजाह में हुआ कोका कोला कप, जहां वो टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाने में नाकाम रहे। जिसके बाद गांगुली की अगुवाई वाली टीम इंडिया को एशिया कप और चैंपियंस ट्रॉफी में भी असफलता मिली।

बतौर कप्तान गांगुली की किस्मत तब बदली जब जॉन राइट ने गांगुली को लक्ष्मण को तीन नंबर पर भेजने के लिए राजी किया। जिसके दम पर भारत ने कोलकाता टेस्ट में एतिहासिक जीत हासिल की। गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया ने अपना पहला बड़ा टूर्नामेंट इंग्लैंड में जीता, जब नेटवेस्ट फाइनल में मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह ने भारत को जीत की रेखा पार कराई। इस जीत की अहमियत गांगुली के जश्न मनाने के तरीके से समझी जा सकती है।

2003 के विश्व कप में गांगुली की टीम इंडिया कुछ खिलाड़ियों शानदार प्रदर्शन के बावजूद खिताब जीतने में नाकाम रही। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार फैंस और खिलाड़ियों सभी के दिल में कांट की चुभी।

विश्व कप में मिली हार के बाद भारतीय टीम का खराब समय शुरू हुआ। घर पर न्यूजीलैंड को हारने के बाद टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई, जहां गांगुली ने अच्छी बल्लेबाजी की और एक शतक भी जड़ा लेकिन टीम सीरीज पर कब्जा नहीं जमा सकी। जिसके बाद भारतीय टीम ने घर पर दक्षिण अफ्रीका को हराया लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ हार गई पाकिस्तान के खिलाफ घर पर मिली हार भारतीय फैंस को बर्दाश्त नहीं हुई और गांगुली समेत सभी भारतीय खिलाड़ियों को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी।

गांगुली-चैपल विवाद

गांगुली पहले ही निजी और पेशेवर जिंदगी में अलग अलग विवादों से जूझ रहे थे जब साल 2005 में ग्रैग चैपल टीम इंडिया के कोच बने। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गांगुली ने अपनी बल्लेबाजी में सुधार किया और ब्रिसबेन में 144 रनों की शानदार पारी खेली। गांगुली खुद भी मानते हैं कि चैपल ने उनकी बल्लेबाजी में सुधार करने में काफी मदद की। हालांकि चैपल के कार्यकाल के दौरान टीम इंडिया कई विवादों से गुजरी।

आईसीसी के लगाए चार मैचों के बैन की वजह से गांगुली उस साल हुए श्रीलंका दौरे पर नहीं जा सके और द्रविड़ को ये जिम्मेदारी मिली लेकिन बैन खत्म होने के बाद भी गांगुली कप्तान पद पर नहीं लौटे और उन्हें द्रविड़ की अगुवाई में खेलना पड़ा।

ये विवाद जिम्बाब्वे दौरे पर और बढ़ा, जब गांगुली कप्तान पद पर लौटे और भारत फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ हार गया। इस दौरे पर जिम्बाब्वे बोर्ड इलेवन के खिलाफ मैच में गांगुली 46 रनों की पारी खेलकर रिटायर हर्ट हो गए।

बीसीसीआई को भेजा विवादास्पद ईमेल

इस दौरे के बारे में चैपल ने अपनी आत्मकथा में लिखा, “जब नई गेंद आने वाली थी तब सौरव चार ओवर खेलकर वापस चले गए। वो रिटायर हर्ट हुए लेकिन उन्हें कोई इंजरी नहीं थी। मैंने उनसे एमआरआई स्कैन के लिए जाने को कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मेरे हिसाब से वो असफलता से डर गए थे।”

चैपल ने ये भी लिखा कि उन्होंने टीम के सीनियर खिलाड़ियों से गांगुली के रवैए पर बात की और सभी ने कहा कि वो सालों से ऐसा करते आए हैं। जिसके बाद चैपल ने बीसीसीआई को एक विवादित ईमेल लिखा जो कि मीडिया में लीक हुआ था।

इस ईमेल ने उन्होंने जिम्बाब्वे दौरे पर हुई घटना का जिक्र किया और कहा कि गांगुली ने इंजरी का बहाना किया और उनके सवाल पूछने पर कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया। जिसके बाद चैपल ने गांगुली को ना केवल कप्तान पद से इस्तीफा देने के लिए कहा बल्कि टीम से बाहर जाने को भी कहा।

क्रिकेट के ‘महाराज’ के पतन की शुरुआत

तेंदुलकर पहले ही उस दौरे से नाम वापस ले चुके थे, ऐसे में जब लक्ष्मण चैपल से ये पूछने गए कि ‘क्या कोच उन्हें भी टीम से बाहर करना चाहते हैं?’ तो चैपल ने लक्ष्मण से ये कबूल करने को कहा कि उनके पास गांगुली से जुड़ी जानकारी है। जिसके बाद गांगुली ने दौरे से बाहर से होने की धमकी दी लेकिन चैपल और द्रविड़ ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। भारत ने ये सीरीज जीत लेकिन चैपल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा की कप्तान सबसे कम फिटनेस ट्रेनिंग करते हैं।

चैपल के बोर्ड को लिखे ईमेल की जानकारी मिलने पर गांगुली ने कहा कि ये ऑस्ट्रेलियाई कोच उनके खिलाफ किसी योजना के साथ टीम में आया है। हालांकि टीम के कई जूनियर खिलाड़ी चैपल के समर्थन में खड़े थे।

बीसीसीआई ने चैपल के ईमेल को मद्देनजर रखते हुए गांगुली को श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम से ड्रॉप कर दिया। द्रविड़ की कप्तानी में भारत से ये सीरीज 4-0 से जीती।

भारतीय जमीन पर फैंस ने किया दक्षिण अफ्रीका का समर्थन

गांगुली के समर्थन में कोलकाता में चैपल के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। लोग सड़को पर उतर आए और महिषासुर की जगह चैपल का पुतला जलाए, जिसके बाद मामला संसद तक पहुंच गया। लेकिन गांगुली को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज के लिए टीम में वापस नहीं लाया गया और ईडन गार्डन्स पर हुए वनडे मैच में फैंस ने टीम इंडिया के बजाय दक्षिण अफ्रीका का खुलकर समर्थन किया।

ए ग्रैड कॉन्ट्रेक्ट मिलने के बावजूद गांगुली को पाकिस्तान के खिलाफ स्क्वाड से बाहर कर दिया गया। जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार से मिलकर उनके सामने अपना पक्ष रखा और मामले की स्वतंत्र जांच कराई गई।

दिसंबर 2008 में गांगुली की टीम इंडिया में वापसी का रास्ता साफ हो गया। पाकिस्तान दौरे पर कैफ की जगह बतौर बल्लेबाजी ऑलराउंडर उन्हें जगह दी गई। हालांकि इस सीरीज में वो कुछ खास कमाल नहीं कर पाए और फिर से टीम से ड्रॉप कर दिए गए।

दोहराया गया इतिहास

कई सालों बाद गांगुली ने इस मामले में उनका साथ ना देने के लिए द्रविड़ के प्रति खुलकर नाराजगी जाहिर की लेकिन वो शायद ये भूल गए कि जब मोहम्मद अजहरूद्दी को टीम में लिए जाने के विरोध में तेंदुलकर कप्तानी से हटे थे और गांगुली ने भी उनका साथ नहीं दिया था।

टीम इंडिया में एक शानदार बल्लेबाज के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाले गांगुली ने बतौर कप्तान भारतीय टीम को कई सफलताएं दिलाई, हालांकि इस दौरान ये खिलाड़ी चारों तरफ से विवादों से घिरा रहा। लेकिन आज गांगुली भारतीय क्रिकेट के बॉस बने बैठे हैं।