सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) जब भारतीय टीम के कप्तान थे तब वो भारत के 2004 में ऐतिहासिक पाकिस्तान दौरे के लिए महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) को टीम में चाहते थे लेकिन विकेटकीपर-बल्लेबाज बहुत करीबी मार्जिन से टीम में आने से चूक गए। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) को चुना गया और पांच मैचों की वनडे सीरीज में राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने विकेटकीपिंग की। Also Read - IPL 2020: 13वें सीजन के पहले मैच में ही वजन को लेकर ट्रोल हुए खिलाड़ी

इस बात का खुलासा टीम के उस समय के कोच जॉन राइट (John Wright) ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में किया। उन्होंने कहा, “धोनी 2004 में पाकिस्तान दौरे के लिए लगभग टीम में आ ही गए थे। गांगुली उन्हें बड़ी शिद्दत से टीम में चाहते थे। वो सीमारेखा पर थे, और ये ऐसा फैसला था जो कहीं भी जा सकता था। लेकिन जैसा हुआ, हमने एक सफल टेस्ट टीम चुनी और धोनी उसमें नहीं थे।” Also Read - कप्तान से पहले बल्लेबाजी करने उतरने पर खुद भी हैरान थे सैम कर्रन, कहा- जीनियस हैं धोनी

भारत ने 15 साल बाद पाकिस्तान में खेली गई टेस्ट सीरीज को 2-1 से जीता और वनडे सीरीज पर 3-2 से कब्जा जमाया।2000 से 2005 तक टीम के कोच रहे राइट ने कहा, “ये वो समय था जब धोनी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने लगे थे। गांगुली उनके बारे में काफी अच्छी बातें कहते थे और जो भी युवा टीम में आता वो उसका हौसला बढ़ाते थे। लेकिन आप नहीं जानते कि चीजें कैसे किस तरफ करवट ले लें। मैंने तब धोनी के बारे में पहली बार सुना था।” Also Read - युवाओं का मार्गदर्शन करने के लिए अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत: एमएस धोनी

धोनी ने दिसंबर-2004 में बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव में वनडे में डेब्यू किया। दिसंबर-2005 में उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ चेन्नई में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच खेला। यहां से धोनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आगे चलकर वो देश के महानतम कप्तानों में से एक बने।

क्राइस्टचर्च से बात करते हुए राइट ने कहा, “और धोनी जल्दी ही खेल को पढ़ने लगे थे। ये एक अच्छे रणनीतिकार कप्तान के लक्षण हैं। वो जाहिर तौर पर भारत के महानतम कप्तानों में से एक हैं। वो भारत के लिए शानदार रहे हैं। उनके रिकार्ड इसके बारे में बताते हैं।”

धोनी के साथ बिताए गए समय के बारे में जब राइट से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि धोनी के साथ उन्होंने कम समय बिताया लेकिन वो इस खिलाड़ी के इंटेलिजेंस से काफी प्रभावित थे।

उन्होंने कहा, “यह साफ था कि धोनी सिर्फ गिफ्टेड क्रिकेटर हैं बल्कि वो काफी चतुर भी हैं। वो काफी अच्छे से सभी की बात सुनते हैं। उन्होंने मेरे साथ पहली सीरीज में ज्यादा कुछ नहीं कहा था, लेकिन वो चीजों को देख रहे थे और सीख रहे थे। मैंने उस समय उनके बारे में सोचा था कि उनके सामने बड़ा भविष्य है।”

राइट से जब पूछा गया कि क्या धोनी जन्मजात कप्तान थे? तो उन्होंने कहा, “मैं ये फैसला नहीं कर सकता क्योंकि मैं वहां था नहीं। वो मेरे कोच रहते सिर्फ एक सीरीज खेले थे। मैंने बाद में जो सुना वो ये था कि उन्हें कप्तानी संभालने में कोई परेशानी नहीं आई वो भी तब जब टीम में काफी अनुभवी और सीनियर खिलाड़ी थे और वो सीनियर खिलाड़ी उनकी कप्तानी का सम्मान करते थे।”