“तू शाही है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमां और भी हैं”

अल्लामा इक़बाल का ये शेर हर उस शख्स को दावत देता है जिसकी बाजुओं में लंबी उड़ान का हौसला हो और कुछ कर गुजरने का जुनून. अचानक से पूरे विश्व में छा जाने वाला नाम सुमित नागल (Sumit Nagal) ऐसे ही जज्बे वाले शख्स हैं. साल के आखिरी टेनिस ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन (US Open) में अपना पहला ग्रैंड स्लैम खेलना, वो भी उनके खिलाफ जिन्हें वह आइडल की फेहरिस्त में रखते हैं, यकीनन चुनौती से भरा होता है. 22 वर्षीय सुमित नागल ने अपने पहले मुकाबले के पहले ही सेट में जब 20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता रोजर फेडरर (Roger Federer) को हराया, तब उनके लहराते हुए रैकेट ने जो कहानी बयां की, उसे देख लोगों को ये अंदाजा हो गया कि यह खिलाड़ी कितनी शिद्दत से इस पल का इंतजार कर रहा था. जाहिर है युवा खिलाड़ी के हौसले को भारत के टेनिसप्रेमियों ने जमकर सराहा. US Open ग्रैंड स्लैम में भारत के के दो खिलाड़ी सुमित नागल और प्रजनेश गुणेश्वरन हिस्सा ले रहे हैं.

सुमित का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से गांव जैतपुर में हुआ है. बहुत कम उम्र से ही खेल-कूद में दिलचस्पी थी और माता-पिता इस बात को जानते भी थे. पिता सुरेश नागल उस समय फौज में थे और उन्हें टेनिस खेलना पसंद था. बेटे नागल की टेनिस के प्रति बढ़ती रुचि ने पूरे परिवार को दिल्ली के नांगलोई में लाकर बसा दिया. आठ साल की उम्र से पिता बेटे को टेनिस का अभ्यास कराने में जुट गए थे. इस दौरान पिता सुरेश टीचर की जॉब करते हुए सुमित को डीडीए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तो कभी पश्चिम बिहार के खेल मैदान में अभ्यास कराने ले जाते थे.

साल 2010 में सुमित का चयन अपोलो टायर की टैलेंट सर्च प्रतियोगिता में हो गया. फिर उसके बाद कभी सुमित ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. दो साल तक अपोलो ने स्पॉन्सर किया फिर उसके बाद सुमित ने महेश भूपति की एकेडमी में ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया. समय गुजरता गया और सुमित की ट्रेनिंग पुख्ता होती चली गई. रैकेट और इस खेल पर उनकी पकड़ मजबूत हुई, तो उन्होंने ट्रॉफियां बटोरनी भी शुरू कर दी. वक्त की रफ्तार के साथ ताल से ताल मिलाते हुए सुमित पिछले 9 वर्षों में कनाडा, स्पेन, जर्मनी में खुद को आजमाते हुए अब अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत का नाम रोशन करने की तैयारी में हैं. रोजर फेडरर के साथ मुकाबला, इसकी एक बानगी थी.

सुमित नागल ने 2015 में जूनियर विंबलडन ग्रैंड स्लैम जीता था और वह इसे जीतने वाले छठे भारतीय बने थे. आज के मुकाबले को लेकर उनके पिता सुरेश नागल बहुत उत्साहित हैं और इसके साथ-साथ पूरा देश सुमित को दुआएं देने में लगा हुआ है.