नई दिल्ली: महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के चयनकर्ताओं पर निशाना साधा है. उन्होंने विश्व कप सेमीफाइनल में भारत (Team India) की हार के बाद भी विराट कोहली को स्वाभाविक तौर पर कप्तान बनाए रखे जाने के फैसला पर सवाल खड़े किए हैं. सुनील गावस्कर मानते हैं कि कोहली (Virat Kohli) को दोबारा कप्तानी सौंपे जाने से पहले आधिकारिक बैठक होनी चाहिए थी. गावस्कर ने सवाल उठाया कि कोहली आखिर किसकी बदौलत कप्तान हैं. कोहली सिर्फ वर्ल्ड कप तक के लिए कप्तान थे. इसके बाद के फैसले के लिए मीटिंग होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. Also Read - विराट कोहली ने मोहम्मद सिराज को किया प्रेरित, बोले- ये हालात तुम्हें मजबूत बनाएंगे

Also Read - India vs Australia: ऑस्ट्रेलिया से भारत भिड़ने को तैयार, जानें- दोनों टीमों के वनडे में 10 बड़े रिकॉर्ड

सुनील गावस्कर ने मिड-डे में प्रकाशित अपने लेख में लिखा है, ‘अगर उन्होंने (चयनकर्ता) वेस्टइंडीज दौरे के लिए कप्तान का चयन बिना किसी मीटिंग के लिए कर लिया तो यह सवाल उठता है कि क्या कोहली अपनी बदौलत टीम के कप्तान हैं या फिर चयन समिति की खुशी के कारण हैं.’ गावस्कर ने लिखा, ‘हमारी जानकारी के मुताबिक उनकी (कोहली) नियुक्ति विश्व कप तक के लिए ही थी. इसके बाद चयनकर्ताओं को इस मसले पर मीटिंग बुलानी चाहिए थी. यह अलग बात है कि यह मीटिंग पांच मिनट ही चलती, लेकिन ऐसा होना चाहिए था.’ बता दें कि कुछ दिन पहले ही एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली बीसीसीआई (BCCI) की चयन समिति ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए कोहली को तीनों फॉर्मेट का कप्तान नियुक्त किया है. इस सीरीज की शुरुआत फ्लोरिडा में होने वाले टी20 मुकाबलों से होगी. Also Read - India vs Australia Practice Match: कोहली की दमदार पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया में 5 विकेट से जीती विराट की टीम

रवि शास्त्री के कोच बने रहने से हमें खुशी होगी: विराट कोहली

सुनील गावस्कर ने लिखा कि आखिरकार कोहली क्यों मनमाफिक टीम चुनने का हक पाते रहे हैं. उन्होंने लिखा, ‘चयन समिति में बैठे लोग कठपुतली हैं. पुनर्नियुक्ति के बाद कोहली को मीटिंग में टीम को लेकर अपने विचार रखने के लिए बुलाया गया. प्रक्रिया को बाईपास करने से यह संदेश गया कि केदार जाधव, दिनेश कार्तिक को खराब प्रदर्शन के कारण टीम से बाहर किया गया, जबकि विश्व कप के दौरान और उससे पहले कप्तान ने इन्हीं खिलाड़ियों पर भरोसा जताया था. नतीजा यह हुआ था कि टीम फाइनल में भी नहीं पहुंच सकी.’