एक समय में भारतीय टीम (Team India) के मध्‍यक्रम का मजबूत हिस्‍सा रहे सुरेश रैना (Suresh Raina Retires) ने भी शनिवार को पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया. रैना ने संन्‍यास के बाद पहली बार इस विषय में खुलकर बात की. उन्‍होंने कहा, ‘ऐसी किसी चीज के लिए रूकना नहीं चाहते थे जो उचित नहीं थी’.Also Read - भारत-पाकिस्तान टी20 विश्व कप मैच में अहम भूमिका निभा सकते हैं रोहित शर्मा, मोहम्मद रिजवान: यूनिस खान

पिछले ढेड़ दशक में सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले रैना ने कहा कि क्रिकेट उनके रगों में दौड़ता है. ‘‘भारतीय टीम में जगह बनाने से पहले बहुत ही कम उम्र से, मैं एक छोटे से लड़के के रूप में अपने छोटे से शहर की गली और नुक्कड़ (गली और कोने) में क्रिकेट खेलता था.’’ Also Read - T20 World Cup 2021: Virat Kohli के लिए जीतो वर्ल्ड कप, Suresh Raina का टीम इंडिया के खिलाड़ियों को मैसेज

उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे जो भी पता है वह क्रिकेट है, मैंने जो कुछ किया है वह क्रिकेट है और यह मेरी रगों में है. ऐसा एक भी दिन नहीं रहा जब मुझे भगवान का आशीर्वाद और लोगों का प्यार नहीं मिला.’’ Also Read - भारतीय खिलाड़ियों को विराट कोहली के लिए टी20 विश्व कप जीतना चाहिए: सुरेश रैना

भारत के लिए 226 एकदिवसीय, 78 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 18 टेस्ट खेलने वाले रैना ने कहा कि उन्होंने कभी भी चोटों को अपने भाग्य को निर्धारित नहीं करने दिया.

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फील्‍डरों में से एक माने जाने वाले रैना ने कहा, ‘‘ मैं उन सभी के आशीर्वाद का मान रखने की कोशिश कर रहा था. अपने देश तथा इस यात्रा का हिस्सा रहे सभी को उसके बदले खेल के जरिये वापस देने की कोशिश कर रहा था.’’

रैना ने कहा, ‘‘ मेरी कई बार सर्जरी हुई, झटके लगे और ऐसे क्षण आये जब मैंने इसके बारे में सोचा लेकिन इसके लिए मैं ऐसी किसी चीज के लिए रूकना नहीं चाहता था जो उचित नहीं थी.’’

रैना ने इस पोस्ट में अपने परिवार, कोच, चिकित्सकों, प्रशिक्षकों, टीम के साथियों और अपने प्रशंसकों से मिले प्यार और समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया.

उन्होंने कहा,‘‘ यह एक अविश्वसनीय यात्रा रही है और यह उन सभी के बिना संभव नहीं होता जिन्होंने करियर में उतार-चढ़ाव के दौरान मेरा समर्थन किया.’’

उन्होंने कहा,‘‘ यह यात्रा मेरे माता-पिता, मेरी प्यारी पत्नी प्रियंका, मेरे बच्चों ग्रेसिया और रियो, मेरे भाइयों, मेरी बहन और हमारे परिवार के सभी सदस्यों के असीम समर्थन और बलिदान के बिना संभव नहीं हो सकता था. यह सब आप ही हैं.’’

रैना उस टीम का हिस्सा थे जिसने 2011 में उनके पसंदीदा कप्तान धोनी के नेतृत्व में विश्व कप जीता था. ‘‘ मेरे कोच जिन्होंने हमेशा मुझे सही दिशा दिखाई, मेरे चिकित्सकों ने मुझे ठीक करने में मदद की, मेरे प्रशिक्षकों ने मुझे उच्चतम स्तर पर प्रदर्शन करने में मदद की.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ नीली जर्सी (भारतीय टीम) के मेरे साथी, नीले रंग में अद्भुत भारत टीम के समर्थन के बिना कुछ भी संभव नहीं होता. मुझे बहुत अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेलने की खुशी है और उन सभी ने ‘टीम इंडिया’ के लिए खेला.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि राहुल भाई (द्रविड), अनिल भाई (कुंबले), सचिन पाजी (तेंदुलकर), चीकू (विराट कोहली) और खासतौर पर महेन्द्र सिंह धोनी के साथ एक दोस्त और मेंटर के रूप में मार्गदर्शन मिलने के अलावा कुछ बेहतरीन सोच वाले कप्तानों की निगरानी में खेलने को मिला. हमेशा, टीम इंडिया. जय हिन्द.’’