नई दिल्ली: जब भारतीय क्रिकेट टीम विदेशी टीमों के खिलाफ खेलने लगीं तब ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं था, जो हिन्दी में कमेंट्री करता हो. उस दौर में एक युवा ने इसकी जिम्मेदारी उठाई और अब इंग्लिश और दूसरी भाषाओं से ज्यादा भारत में हिंदी कमेंट्री सुनी जाने लगी. हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं रहा. उन्हें कई तरह की चुनौतियों और मुश्किलों का सामना करना पड़ा और सालों मेहनत करने के बाद उन्होंने हिंदी को भी क्रिकेट में कमेंट्री का हक दिलाया. हम बात कर रहे हैं सुशील दोषी की… Also Read - IND vs AUS: डेब्‍यूटेंट टी नटराजन, वाशिंगटन सुंदर की शानदार गेंदबाजी से 369 पर सिमटा ऑस्‍ट्रेलिया

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400 ज्यादा वनडे इंटरनेशनल और टी-20 मैचों में कमेंट्री कर चुके सुशील ने इंडिया.कॉम से बात करते हुए बताया कि उन्होंने महज 17-18 साल की उम्र में ही कमेंट्री की शुरुआत कर दी थी. हालांकि तब हिंदी में कमेंट्री को तवज्जो नहीं दी जाती थी. उन्होंने बताया कि वो एक बार आकाशवाणी की के दफ्तर गए. सुशील ने बताया कि इस दौरान स्टेशन डायरेक्टर ने उन्हें यह कह कर जाने को कह दिया कि क्रिकेट के लिए हिंदी कमेंट्री कैसे करोगे. क्रिकेट के नियमों को हिंदी कैसे ट्रांसलेट करोगे. Also Read - 4th Test: भारत की बढ़ी मुश्किलें, अब Navdeep Saini भी हुए चोटिल, Rohit Sharma ने पूरा किया ओवर

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इसके कुछ दिन बाद आकाशवाणी को एक हिंदी कमेंटटर की जरूरत पड़ी. उस दौरान सुशील को ट्रायल के लिए बुलाया गया. उन्होंने हिंदी में कमेंट्री का ट्रायल दिया और उनका चयन हो गया. हालांकि स्टेशन डायरेक्टर इससे ज्यादा खुश नहीं थे. भारतीय टीम के मैच के दौरान सुशील ने कमेंट्री तो की लेकिन वह सकारात्मक नहीं रही. मैच के अगले दिन तमाम अखबारों ने हिंदी कमेंट्री की आलोचना की. कई अखबारों ने इस पर संपादकीय भी छापे. इस घटना के बाद सुशील थोड़ा आहत हुए. लेकिन उन्होंने लक्ष्य का पीछा करना नहीं छोड़ा.

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बता दें कि सुशील 400 से ज्यादा इंटरनेशनल वनडे और टी-20 मैचों में कमेंट्री कर चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने 10 क्रिकेट वर्ल्डकप में भी कमेंट्री की है. इसमें 5 टी-20 मैच और 5 वनडे वर्ल्डकप शामिल हैं. अहम बात यह भी है कि इंदौर के होल्कर स्टेडियम में इनके नाम पर एक कमेंट्री बॉक्स भी है. असल में सुशील इंदौर के ही निवासी हैं.