नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया को 71 साल बाद टेस्ट सीरीज में हराना भारत के लिए मुश्किल रहा. जो लाला अमरनाथ, सुनील गावस्कर और महेन्द्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज कप्तान नहीं कर पाए वो विराट कोहली ने कर दिखाया. कोहली बतौर खिलाड़ी तो सर्वश्रेष्ठ हैं ही और अब वो खुद को एक श्रेष्ठ कप्तान के रूप में भी साबित कर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया दौरा भारत के लिए कई वजहों से खास रहा. उसने टेस्ट सीरीज में जीत हासिल करने के साथ कुछ ऐसे खिलाड़ियों की खोज की जो आने वाले समय टेस्ट टीम के मजबूत स्तम्भ साबित हो सकते हैं. इसमें पहला नाम मयंक अग्रवाल का है. इस फेहरिस्त में मयंक के साथ हनुमा विहारी और ऋषभ पंत को भी शामिल किया जायेगा. Also Read - ICC Rankings: T20 रैंकिंग में नंबर वन बना इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया को पहले पायदान से हटाया

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टीम इंडिया में मयंक बतौर ओपनर जगह पक्की कर चुके हैं. उन्होंने लम्बे संघर्ष के बाद टीम में जगह बनाई और मौका मिलते ही खुद को बेहतर साबित किया. मयंक के साथ ही हनुमा विहारी और ऋषभ पंत का भी नाम आयेगा. हनुमा बतौर ऑलराउंडर टीम में शामिल हुए. उन्होंने मिडिल ऑर्डर में अच्छी बैटिंग की. इसके अलावा वो ओपनिंग में भी अपना काम कर गए. लेकिन उन्हें ओपनिंग में ऑप्शन के रूप में ही रखा जायेगा. इसके अलावा ऋषभ पंत भी पूरी सीरीज में खुद को बेहतर से बेहतरीन करते दिखाई दिए. उन्होंने बतौर बैट्समैन खुद को पारी दर पारी समझ को बढ़ाया. Also Read - ग्रोइन इंजरी से जूझ रहे David Waner को अब क्‍यों आई Bahubali की याद, बताई वजह

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मयंक की बात करें तो उन्होंने डेब्यू टेस्ट मैच की पहली पारी में 76 रन की शानदार पारी खेली. उन्होंने 161 गेंदों का सामना करते हुए 8 चौके और एक छक्का भी लगाया. जब कि दूसरी पारी में भी 42 रन का अहम योगदान दिया. उन्होंने सिडनी टेस्ट की पहली पारी में 77 रन बनाए. इस दौरान 7 चौके और 2 छक्के भी जड़े. इस तरह मयंक ने खुद बेहतर साबित किया. जहां लोकेश राहुल और मुरली विजय जैसे अनुभवी खिलाड़ी फ्लॉप साबित हुए, वहां मयंक ने भारत को अच्छी शुरुआत दी. उन्होंने 3 पारियों में 65 के एवरेज से 195 रन बनाए.

मिडिल ऑर्डर बैट्समैन हनुमा ने 5 पारियों में 22.20 के औसत से 111 रन बनाए. लेकिन उनके ये रन भारतीय टीम के लिए काफी अहम रहे. उन्होंने शुरुआती पारियों में मिडिल ऑर्डर में बैटिंग की. लेकिन मयंक के ओपनिंग में आते ही उन्हें भी ओपनिंग का मौका दिया गया. हनुमा मेलबर्न टेस्ट में बतौर ओपनर खेले. यहां उन्होंने मयंक के साथ मिलकर एक छोर संभाले रखा. इस दौरान उन्होंने 66 गेंदों का सामना करते हुए 8 रन बनाए. दरअसल यहां उन्हें विकेट बचाने के नजरिए से ही भेजा गया, जो कि हनुमा किया. उन्होंने दूसरी पारी में भी 45 गेंदों का सामना किया. दिलचस्प बात यह रही कि भारत ने इस टेस्ट मैच को जीत लिया. इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बॉलिंग में भी मौका दिया. जहां उन्होंने उम्मीद से अच्छा प्रदर्शन किया.

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ऋषभ पंत टीम इंडिया की सबसे अहम खोज हैं. वो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में दूसरे स्थान पर हैं. पंत ने 7 पारियों में 58.33 के एवरेज से 350 रन बनाए. उन्होंने एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में 25 और दूसरी पारी में 28 रन बनाए, जबकि इसके बाद पर्थ टेस्ट की दोनों पारियों में 30 से ज्यादा रन बनाए. मेलबर्न में भी अच्छी बल्लेबाजी की. लेकिन जब वो सिडनी में बैटिंग करने उतरे तब एक अलग ही रूप दिखा. यहां पंत ने 189 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 159 रन बनाए. उन्होंने इस शतक की बदौलत कई खास रिकॉर्ड तोड़े. दिलचस्प बात यह रही को वो ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट शतक जड़ने वाले पहले एशियाई विकेटकीपर बैट्समैन बन गए.