नई दिल्ली. एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में जब भारतीय टॉप ऑर्डर सिर्फ 100 रन के अंदर लुढ़क गया था तो लगा कि ऑस्ट्रेलिया दौरे का हाल भी कमोवेश कुछ वैसा ही होगा जैसा कि इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका में देखने को मिला था. लेकिन, ऐसा हुआ नहीं. भारत के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई टीम का हाल और भी बेहाल दिखा, जिसकी वजह से टीम इंडिया अब ड्राइविंग सीट पर नजर आ रही है. दूसरे लहजे में कहें तो एडिलेड टेस्ट अब टीम इंडिया की मुट्ठी में है और मेजबान ऑस्ट्रेलिया की जीत तो नहीं लेकिन हार तय दिख रही है.

ऑस्ट्रेलिया को बदलना होगा इतिहास

हम ऐसा क्यों कह रहे हैं अब उसे जरा इन आंकड़ों से समझिए. एडिलेड ओवल पर चौथी पारी में जो सबसे बड़ा स्कोर चेज हुआ है वो 315 रन का रहा है. ये लक्ष्य 117 साल पहले यानी कि 1902 में ऑस्ट्रेलिया ने ही इंग्लैंड के खिलाफ चेज किया था. जबकि, विराट एंड कंपनी ने साल 2018 में ऑस्ट्रेलियाई टीम के सामने जो जीत का टोटल रखा है वो 323 रन का है.

आखिरी बार 12 साल पहले किया 250+ चेज

अब जरा कुछ और आंकड़ों पर भी नजर डालिए जो ये बयां कर रहे हैं कि भारत के खिलाफ एडिलेड टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की जीत क्यों मुश्किल है. अपने घरेलू मैदान पर खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने आखिरी बार 250 रन से ज्यादा का टारगेट चौथी पारी में साल 2006 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ चेज किया था. इन 12 सालों के दौरान काफी कुछ बदल चुका है. तब टीम इंडिया टेस्ट की बेस्ट नहीं थी और न ही ऑस्ट्रेलियाई टीम तब इतनी फिसड्डी थी, जितनी अब है.

भारत के ‘मुट्ठी’ में एडिलेड

पिछले 100 सालों में ऑस्ट्रेलिया ने 14 बार 200 प्लस का टारगेट एडिलेड में चेज किया है. जिसमें उन्हें एक बार भी जीत नसीब नहीं हुई. 6 बार हार का सामना करना पड़ा और 8 बारी मुकाबले का नतीजा ड्रॉ पर खत्म हुआ. साफ है किसी भी कंडीशन में एडिलेड टेस्ट टीम इंडिया की मुट्ठी से फिसलने नहीं वाला क्योंकि ऐसा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया को 117 साल पुराना रिकॉर्ड चूर-चूर करना होगा.