पिछले दो सालों में भारत के लिए वनडे, टेस्ट और टी20 तीनों फॉर्मेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) और मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अहम भूमिका निभा सकते हैं। शमी और बुमराह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले तीन वनडे, तीन टी20 और चार टेस्ट मैचों के लिए भारतीय स्क्वाड का हिस्सा हैं, ऐसे में इन दोनों प्रमुख गेंदबाजों का वर्कलोड मैनेज करना टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। Also Read - India vs Australia- युवा खिलाड़ी बोला- मेरा पहला ऑस्ट्रेलिया दौरा, कोई टारगेट नहीं लेकिन करूंगा अच्छा

खबरों की मानें तो बीसीसीआई जांची-परखी रोटेशन पॉलिसी की मदद से बुमराह और शमी का वर्कलोड मैनेज करेगी। पीटीआई से बातचीत में बोर्ड के एक सूत्र ने कहा, ‘‘यदि दोनों (बुमराह और शमी) टी20 (चार, छह और आठ दिसंबर) सीरीज में खेलते हैं, तो उन्हें टेस्ट अभ्यास के लिए एक ही मैच मिलेगा, मुझे नहीं लगता कि टीम मैनेजमेंट ऐसा चाहेगा।’’ Also Read - विराट कोहली ने मोहम्मद सिराज को किया प्रेरित, बोले- ये हालात तुम्हें मजबूत बनाएंगे

बोर्ड को उम्मीद है कि सीनियर तेज गेंदबाज 17 नवंबर को टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले फिट होकर ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाएंगे, ऐसे में बुमराह या शमी के एक-एक मैच खेलने से भी टीम इंडिया का पेस अटैक कमजोर नहीं होगा। हालांकि शर्मा की चोट की स्थिति अभी साफ नहीं है लेकिन उन्होंने बैंगलोर स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी में अभ्यास शुरू कर दिया है। Also Read - India vs Australia: यह कंगारू खिलाड़ी बढ़ाएगा भारत की टेंशन, रिकी पोंटिंग ने कह दी यह बड़ी बात

फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद ही इशांत स्क्वाड से जुड़ सकेंगे जो कि अहम है क्योंकि टीम मैनेजमेंट बुमराह-शमी को 12 दिनों के अंदर सीमित ओवरों के छह मैचों में एक साथ मैदान में उतार कर कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगा।

मुमकिन है कि वनडे-टी20 सीरीज के दौरान बुमराह या शमी में एक गेंदबाज को एक मैच के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह दी जाय। ताकि दोनों गेंदबाज टेस्ट सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार रहें। जिसका मतलब है कि सीमित ओवर फॉर्मेट के दौरान नवदीप सैनी, शार्दुल ठाकुर और दीपक चाहर जैसे युवा गेंदबाजों को मौके मिल सकते हैं।