नई दिल्ली : टीम इंडिया के लिए 2 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक है. यह वही तारीख है जब महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने विश्व क्रिकेट में परचम लहराया था. हम बात तकर रहे हैं वर्ल्ड कप 2011 की. इस टूर्नामेंट का फाइनल मैच 2 अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था. यहां भारतीय टीम ने श्रीलंका को 8 विकेट से हराकर वर्ल्ड कप अपने नाम किया था. भारत की यह सचिन तेंदुलकर को संन्यास से पहले मिला सबसे अच्छा गिफ्ट था. वहीं इस जीत ने कपिल देव की याद को ताजा किया. कपिल की कप्तानी में भारत ने 1983 में वर्ल्ड कप जीता था इस ऐतिहासिक दिन को 8 साल हो गए.

भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 29 रन से हराया था. सेमीफाइनल में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 260 रन बनाए. इसके जवाब में उतरी पाक टीम 231 रन पर ऑलआउट हो गई. जबकि इसके बाद भारत को श्रीलंका के खिलाफ फाइनल खेलना था. श्रीलंका ने पहले बैटिंग करते हुए 274 रन बनाए. इस दौरान भारत के लिए जहीर और युवराज ने 2-2 विकेट लिए. जबकि इसके बाद भारतीय बैटिंग करने उतरी.

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टीम इंडिया के लिए वीरेन्द्र सहवाग और सचिन ओपनिंग करने आए. सहवाग बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए. जबकि सचिन 18 रन बनाकर आउट हुए. लेकिन इसके बाद गौतम गंभीर ने बागडोर संभाली. उन्होंने 9 चौकों की मदद से 97 रन की अहम पारी खेली. गंभीर के आउट होने के बाद धोनी ने मोर्चा संभाला. उन्होंने 79 गेंदों का सामना करते हुए 8 चौकों और 2 छक्कों की मदद से नाबाद 91 रन बनाए. धोनी ने अंतिम में छक्का जड़कर मैच खत्म किया.

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गौरतलब है कि पहली भारतीय टीम ने 1983 में वर्ल्ड कप जीता. इस टूर्नामेंट में कपिल देव कप्तानी कर रहे थे. फाइनल मुकाबला वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला गया. भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 183 रन बनाए. इस दौरान श्रीकांत ने 38 रन की अहम पारी खेली. जबकि कपिल ने 15 रन और अमरनाथ ने 26 रन का योगदान दिया. इसके जवाब में उतरी वेस्टइंडीज की टीम 140 रन पर ऑलआउट हो गई. इस दौरान भारत के लिए मदन लाल ने 3 विेकेट और अमरनाथ ने भी 3 विेकेट लिए. जबकि कपिल को एक विकेट मिला.