क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई मैच हुए हैं जिसे सालों तक याद किया जाता है. मगर उन्हीं इतिहास में ऐसे भी कुछ मैच रहे हैं जिसमें कोई  खिलाड़ी  हमेशा के लिए अमर हो गया हो . भारतीय क्रिकेट की दराज में भी ऐसे कुछ मैच महफूज है जिसे हर युग में याद किया जाएगा. इन मैचों को इतिहास के सुनहरे पन्नों पर कैद करने में जिन खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से इसे मुमकिन किया है, उन्हें भी भारतीय क्रिकेट कभी नहीं भूल पाएगी. 31 अक्टूबर 1987 एक ऐसा दिन था जब भारतीय क्रिकेट टीम के  दो दिग्गजों ने अपनी कौशलता से इस मैच को हमेशा के लिए जिंदा कर दिया था.

इस मैच ने चेतन शर्मा को कर दिया था अमर

जी हैं, आज के ही दिन टीम इंडिया में दो यादगार इतिहास रचे गए थे. साल था 1987 और तारीख थी 31 अक्टूबर. रिलायंस विश्व कप में भारत के सामने थी न्यूजीलैंड की टीम और इस मैच पर निर्भर था सेमीफइनल में भारत के साथ पाकिस्तान खेलेगी या इंग्लैंड. इस मैच में टीम इंडिया के इन दो सितारों ने कुछ ऐसा कर दिया जिसकी वजह से यह मैच बरसों तक याद किया गया और किया जाएगा. बात हो रही है भारतीय पूर्व पेसर चेतन शर्मा की और पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर की. चेतन शर्मा ने इस मैच में हैट्रिक विकेट लेकर विपक्षी टीम की कमर तो तोड़ी ही थी लेकिन इसके साथ साथ उन्होंने अपने नाम एक नायाब रिकॉर्ड भी दर्ज कर लिया था. चेतन शर्मा विश्व कप में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए और कमाल की बात तो ये है कि चेतन ने तीनों विकेट बोल्ड ही किया था और ये रिकॉर्ड आज तक उनके ही नाम है.

सुनील गावस्कर और चेतन शर्मा

सुनील गावस्कर का 16 साल पुराना ख्वाब हुआ था मुकम्मल

पहले बल्लेबाजी करने उतरी ब्लैककैप्स की टीम ने संघर्ष करते हुए पांच विकेट पर 181 रन बना लिए थे मगर चेतन की घातक गेंदबाजी के आगे कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं सका.चेतन ने  पहले रदरफोर्ड को बोल्ड किया और उसकी अगली दो गेंदों पर इयान स्मिथ और चैटफील्ड को बोल्ड कर विश्व कप में वह इतिहास रच दिया जिसकी बदौलत वो आज भी याद किए जाते हैं और कल भी याद किए जाएंगे.

न्यूजीलैंड हो गई थी ढेर

टीम इंडिया के इस होनहार गेंदबाज ने विपक्षी टीम को महज 221 रनों पर ढेर कर दिया. टीम इंडिया को अंक तालिका में शीर्ष पर रहने के लिए इस  लक्ष्य को 42.2ओवरों में पार करना था. अब बारी थी एक ऐसे ख्वाब को पूरा होने की जिसने 16 सालों तक इस सपने को जीया था. बल्ला थामा सुनील गावस्कर ने और फिर उन्होंने 85 गेंदों में अपने वनडे करियर का पहला शतक लगा कर टीम की नैया को पार तो लगा दिया था लेकिन साथ में उन्होंने अपने करियर के एक कीमती ख्वाब को भी पूरा कर लिया था. गावस्कर की इस तूफानी पारी की बदौलत टीम इंडिया ने इस लक्ष्य को 32.1 ओवर में ही आसानी से हासिल कर लिया था.

हालांकि सेमीफइनल में भारत को इंग्लैंड ने हरा कर फाइनल में जगह बना ली थी मगर टीम इंडिया की सेमीफइनल से पहले की राह को पूरी दुनिया आज भी याद करती है.