कोविड-19 महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण इस वर्ष जुलाई-अगस्त में आयोजित होने वाले टोक्यो ओलंपिक को एक साल के लिए टाल दिया गया है. कोरोनावायरस ने इस समय पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रखा है. इस वायरस के चपेट में आकर दुनिया में लगभग 15 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि तीन लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं. भारत में इससे संक्रमित लोगों की संख्या 500 सेे अधिक पहुंच गई है जबकि 10 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. Also Read - VIDEO: कोरोना संकट के बीच दिखा ये नजारा, विधायक ने खुलेआम एएसआई के छुए पैर

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने मंगलवार को घोषणा की कि विश्व भर में फैली कोरोना वायरस महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक खेल 2020 को अगले साल गर्मियों तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. पूर्व कार्यक्रम के अनुसार इन खेलों का आयोजन 24 जुलाई से नौ अगस्त के बीच होना था लेकिन आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच टेलीफोन पर बातचीत के बाद ओलंपिक को पहली बार शांतिकाल में भी स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला किया गया. Also Read - COVID-19: उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 116 हुई

आबे ने इससे पहले कहा था कि जापान ने आईओसी से खेलों को एक साल के लिए स्थगित करने के लिए कहा जिस पर बाक ने शत प्रतिशत सहमति जताई. आईओसी पर खेलों को स्थगित करने का दबाव बढ़ गया था क्योंकि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड ने भी इन्हें टालने की मांग की थी. Also Read - सबसे पहले रेलवे को हुई थी तबलीगी जमात में कोरोना की जानकारी, ट्रेन में मिले थे मरीज, फिर भी...

शिंजो आबे ने कहा, ‘मैंने खेलों को एक साल के लिए स्थगित करने की पेशकश की और (आईओसी अध्यक्ष थॉमस) बाक ने इस पर शत प्रतिशत सहमति जताई.

यह टोक्यो शहर के लिए बड़ा झटका है जिसकी ओलंपिक खेलों की तैयारियों के लिए अब तक काफी सराहना हुई है. खेलों के लिए स्टेडियम काफी पहले तैयार हो गए थे और बड़ी संख्या में टिकट भी बिक गए थे.

ओलंपिक को अब बहिष्कार, आतंकी हमले और विरोधों का सामना करना पड़ा है लेकिन 1948 के बाद इन्हें हर चार साल में आयोजित किया जाता रहा है. यह दुनिया भर में हजारों लोगों की जान लेने वाले कोरोना वायरस से प्रभावित सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता होगी. इस महामारी के कारण दुनिया भर की खेल प्रतियोगिता ठप्प पड़ी हुई हैं.

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आईओसी पर 24 जुलाई से शुरू होने वाले खेलों को स्थगित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा था क्योंकि कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया में एक अरब 70 करोड़ लोग घरों में बंद हैं.

अधिकतर खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक की तैयारियां करना मुश्किल हो गया था क्योंकि इससे उनके बीमारी से सक्रमित होने का खतरा था. विभिन्न प्रतियोगिताएं और क्वालीफायर्स रद्द कर दी गयी थी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा सीमित कर दी गई हैं.

आईओसी ने  चार सप्ताह की समयसीमा तय की थी

आईओसी ने रविवार को खेलों के भविष्य पर फैसला करने के लिए खुद के लिए चार सप्ताह की समयसीमा तय की थी. लेकिन कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम भेजने से इन्कार कर दिया और बाद में प्रभावशाली अमेरिकी ओलंपिक समिति और विश्व एथलेटिक्स भी खेलों को स्थगित करने की मांग में शामिल हो गयी.

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टोक्यो ने खेलों की मेजबानी पर 12 अरब 60 करोड़ डालर खर्च किया है और इसके ताजा बजट को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों को स्थगित करने से छह अरब डालर का अतिरिक्त खर्चा होगा.

प्रायोजकों और प्रसारकों के लिए बड़ा झटका 

यह प्रायोजकों और प्रमुख प्रसारकों के लिए भी करारा झटका है जो कि विज्ञापन से होने वाले राजस्व के लिये हर चार साल में होने वाले खेल महाकुंभ का इंतजार करते हैं.

यह पहला अवसर नहीं है जबकि टोक्यो ने खेलो के कार्यक्रम में बदलाव देख रहा है. इससे पहले उसे 1940 में भी मेजबानी मिली थी लेकिन चीन के साथ जापान के युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय दबाव में उसे इससे हटना पड़ा था.