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Tokyo Olympics 2020: कभी वेटलिफ्टर नहीं बल्कि तीरंदाज बनना चाहती थीं Mirabai Chanu
तोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानूं को खेलों से प्यार तो बचपन से ही था. लेकिन उनका पहला प्यार आर्चरी था.
भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) पर अब हर देशवासी फिदा है आखिर क्यों न हों उन्होंने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics 2020) में भारत के लिए नया इतिहास जो रच दिया. इस वेटलिफ्टर ने 49 किलो भार वर्ग में 202 किलो (87 किलो स्नैच और 115 किलो क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर देश की झोली में सिल्वर मेडल डाल दिया. इन ओलंपिक खेलों में यह भारत का पहला मेडल भी है. लेकिन क्या आप जानते हैं मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) का सपना वेटलिफ्टर बनने का नहीं बल्कि एक तीरंदाज (आर्चर) बनने का था.
अपने इस सपने के लिए वह 13 साल की उम्र में ट्रेनिंग के लिए इम्फाल के साई (SAI) सेंटर भी पहुंच गईं. लेकिन उन दिनों इम्फाल में आर्चरी (Mirabai Chanu Wanted to be An Archer) की सुविधाएं नहीं थीं, जिसके चलते उन्हें अपना यह इरादा बदलना पड़ा. चानू ने एक इंटरव्यू में खुद बताया कि वह आर्चरी का खेल इसलिए चुनना चाहती थीं क्योंकि यह बहुत ही साफ सुथरा खेल है, जिसमें कपड़े बिल्कुल भी गंदे नहीं होते.
साफ-सुथरा खेल चुनने की वजह यह थी कि उनके सभी भाई और चचेरे भाई फुटबॉल खेला करते थे. लेकिन जब वे सभी शाम को घर पहुंचते थे तो उनके कपड़े बहुत गंदे होते थे. इसलिए वह ऐसा खेल खेलना चाहती थीं, जो साफ सुथरा हो. इसलिए आर्चरी उन्हें भाने लगा. लेकिन जब आर्चरी के लिए उन्हें सुविधाएं नहीं मिलीं, तो इस दौरान उनकी नजर वेटलिफ्टिंग के कुछ वीडियो पर पड़ी.
ये वीडियो क्लिप्स देश की पूर्व वेटलिफ्टर कुंजारानी (Kunjarani Devi) देवी के थे. इंटरनेशनल लेवल पर कई मेडल अपने नाम कर चुकीं कुंजारानी ने मीराबाई चानू को भी अपने खेल का मुरीद बना लिया और उसी दिन से मीराबाई (Mirabai Chanu Weightlifter) ने वेटलिफ्टर बनने का फैसला किया. इसके बाद एक बार फिर वह SAI के वेटलिफ्टिंग ट्रेनिंग सेंटर में गईं और किस्मत से यहां उन्हें अनीता चानू (Anita Chanu) मिल गईं, जिसने इस खेल में उन्हें लाने का अहम रोल निभाया.
यह मीराबाई की सच्ची लगन का ही नतीजा है जो उन्होंने ओलंपिक में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है. उनका घर कोचिंग सेंटर से 20 किलोमीटर दूर था और वो ट्रक में लिफ्ट लेकर या साइकिल से रोजाना वहां पहुंचती थीं. बारिश आए या तूफान मीराबाई कभी अपनी ट्रेनिंग नहीं छोड़ती थीं.
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