टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में कांस्य पदक जीतने के बाद पीवी सिंधू (PV Sindhu) को मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद (P Gopichand) से बधाई संदेश मिला जबकि सीनियर खिलाड़ी साइना नेहवाल (Saina Nehwal) ने उन्हें बधाई नहीं मिली।Also Read - OMG! पी वी सिंधु और दीपिका पादुकोण नज़र आये एक साथ वर्ली में, संजय दत्त भी किए गए स्पॉट | Exclusive Video

रविवार को, टोक्यो ओलंपिक के दसवें दिन सिंधू दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय और देश ही पहली महिला खिलाड़ी बनीं। सिंधू ने इससे पहले रियो खेलों में रजत पदक जीता था। Also Read - उत्कृष्टता हासिल करने के लिए विराट कोहली को फॉलो करना चाहते हैं पीआर श्रीजेश

ये पूछने पर कि क्या पदक जीतने के बाद गोपीचंद और साइना ने उनसे बात की, सिंधू ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘बेशक गोपी सर ने मुझे बधाई दी। मैंने अब तक सोशल मीडिया नहीं देखा है। मैं धीरे धीरे सभी को जवाब दे रही हूं। गोपी सर ने मुझे संदेश भेजा। साइना ने नहीं। हम काफी बात नहीं करते।’’ Also Read - Neeraj Chopra Ke Thumke: टोक्यो में स्वर्ण जीतने वाले नीरज चोपड़ा का डांस VIDEO वायरल, ठुमके देख आप भी रह जाएंगे दंग

पिछले साल कोविड-19 महामारी के बीच सिंधू तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए लंदन गई थी जिसके बाद उनके और गोपीचंद के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थी। स्वदेश लौटने पर भी सिंधू ने गोपीचंद अकादमी की जगह पार्क तेइ-सांग के मार्गदर्शन में गचीबाउली इंडोर स्टेडियम में ट्रेनिंग का फैसला किया।

सिंधू ने सोमवार को कहा कि बैडमिंटन महिलाएकल सेमीफाइनल में हार के बाद वो निराश थी लेकिन कोच पार्क तेइ-सांग ने उन्हें प्रेरित किया कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है और चौथे स्थान पर रहने से बेहतर है कि कांस्य पदक जीतकर स्वदेश लौटो।


सिंधू को महिला एकल सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की ताइ जू यिंग के खिलाफ 18-21, 12-21 से शिकस्त झेलनी पड़ी थी लेकिन रविवार को वह कांस्य पदक के प्ले आफ में चीन की आठवीं वरीय ही बिंग जियाओ को सीधे गेम में 21-13, 21-15 से हराकर पदक जीतने में सफल रही।

रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता और विश्व चैंपियन सिंधू से जब सेमीफाइनल में हार के बाद की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा, ‘‘सेमीफाइनल में हार के बाद मैं निराश थी क्योंकि मैं स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश नहीं कर पाई। कोच पार्क ने इसके बाद मुझे समझाया कि अगले मैच पर ध्यान दो। चौथे स्थान पर रहकर खाली हाथ स्वदेश लौटने से बेहतर है कि कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवांवित करो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोच के शब्दों ने मुझे प्रेरित किया और मैंने अपना पूरा ध्यान कांस्य पदक के मुकाबले पर लगाया। मैच जीतने के बाद पांच से 10 सेकेंड तक मैं सब कुछ भूल गई थी। इसके बाद मैंने खुद को संभाला और जश्न मनाते हुए चिल्लाई।’’