टोक्‍यो ओलंपिक में भारत को 13 साल बाद स्‍वर्ण पदक जिताने वाले युवा एथलीट नीरज चोपड़ा भाला फेंक प्रतियोगिता में अपने आखिरी थ्रो के दौरान जीत के मकसद से नहीं बल्कि ओलंपिक रिकॉर्ड बनाने के इरादे से उतरे थे. इंडियन आर्मी की राष्‍ट्रीय राइफल रेजिमेंट में सूबेदार नीरज ने बताया कि वो अंतिम थ्रो से पहले ही जान चुके थे कि गोल्‍उ उनका हो चुका है. लिहाज अंत में वो रिकॉर्ड बनाने के इरादे से उतरे.Also Read - Kaun Banega Crorepati 13 में होगी 'गोल्डन ब्यॉय' Neeraj Chopra और पीआर श्रीजेश की एंट्री, मचेगा धमाल

नीरज चोपड़ा सहित कुल 12 एथलीट ने भाला फेंक प्रतियोगिता में भाग लिया. वो अपने दूसरे प्रयास में ही ओलंपिक पदक दिलाने वाले लक्ष्‍य तक पहुंच गए थे. ऐसे में तीन बार प्रयास करने के बाद अगले तीन प्रयासो में उन्‍हें अंत में मौका‍ दिया गया. जैसे ही रजत पदक विजेता चेक गणराज्य के जाकुब वाडलेच ने अपना अंतिम थ्रो पूरा किया, चोपड़ा जान गये थे कि उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया है. Also Read - Neeraj Chopra का सपना पूरा, माता-पिता को पहली बार कराया 'हवाई सफर'

नीरज ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘मैं थ्रो करने वाला अंतिम खिलाड़ी था और हर कोई थ्रो कर चुका था, मैं जान गया था कि मैं स्वर्ण जीत गया हूं, तो मेरे दिमाग में कुछ बदल गया, मैं इसे बयां नहीं कर सकता. मैं नहीं जानता कि क्या करूं और यह इस तरह का था कि मैंने क्या कर दिया है. ’’ Also Read - नीरज चोपड़ा, सुमित अंतिल की सफलता के बाद क्रिकेट जितना लोकप्रिय होगा भालाफेंक: अनुराग ठाकुर

चोपड़ा ने कहा, ‘‘मैं भाले के साथ ‘रन-अप’ पर था लेकिन मैं सोच नहीं पा रहा था. मैंने संयम बनाया और अपने अंतिम थ्रो पर ध्यान लगाने का प्रयास किया जो शानदार नहीं था लेकिन फिर भी ठीक (84.24 मीटर का) था. ’’

उन्होंने यह भी कहा कि वह 90.57 मीटर (नार्वे के आंद्रियास थोरकिल्डसन के 2008 बीजिंग ओलंपिक में बनाये गये) के ओलंपिक रिकार्ड का लक्ष्य बनाये हुए थे लेकिन ऐसा नहीं कर सके.

चोपड़ा ने कहा, ‘‘पहले दो थ्रो अच्छा होने के बाद (जो 87 मीटर से ऊपर के थे) मैंने सोचा कि मैं ओलंपिक रिकार्ड की कोशिश कर सकता हूं. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.’’