Tokyo Olympic 2020: पूर्व हॉकी दिग्गज Dhanraj Pillay बोले- अब जीवन में कोई मलाल नहीं

धनराज पिल्लै ने कहा कि मैं अकसर यही सोचता था कि क्या अपने जीवन में भारतीय हॉकी टीम को ओलंपिक मेडल जीतते देख पाऊंगा.

Published: August 5, 2021 3:53 PM IST

By India.com Hindi Sports Desk | Edited by Arun Kumar

Tokyo Olympic 2020: पूर्व हॉकी दिग्गज Dhanraj Pillay बोले- अब जीवन में कोई मलाल नहीं
धनराज पिल्लै और भारतीय हॉकी टीम @Twitter

भारतीय हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने के क्या मायने हैं. इसे हॉकी के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी धनराज पिल्लै (Dhanraj Pillay) के एक वाक्य से समझा जा सकता है. धनराज पिल्लै ने कहा कि जीवन में कोई मलाल नहीं है. पिल्लै ने कहा कि उन्हें हमेशा से यह मलाल था कि वह ओलंपिक पदक नहीं जीत सके. फिर सोचते थे कि क्या वह अपने जीवन में भारत को कभी ओलंपिक पदक जीतते देखेंगे या नहीं. अब इस ऐतिहासिक जीत के बाद सारे मलाल मिट गए.

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भारतीय हॉकी टीम का ओलंपिक में पदक जीतने का 41 साल का इंतजार खत्म हुआ है. भारत ने ब्रॉन्ज मेडल मैच के लिए खेले गए प्ले ऑफ मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल पर अपना कब्जा जमा लिया. पुरुष हॉकी टीम की इस जीत के बाद सारा देश जश्न में डूब गया है. भारत की इस ऐतिहासिक जीत पर महान स्ट्राइकर धनराज पिल्लै भी गदगद हैं. भारत की इस जीत के बाद वह भारतीय हॉकी के स्वर्णिम अतीत की यादों में खो गए हैं.

देश के लिए 339 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके धनराज ने अपने सुनहरे करियर में 4 ओलंपिक (1992, 1996, 2000 और 2004) और चार वर्ल्ड कप खेल चुके धनराज ने न्यूज एजेंसी भाषा से बातचीत में कहा, ‘मुझे हमेशा से यह मलाल था कि मैं ओलंपिक पदक नहीं जीत सका. फिर सोचता था कि अपने जीवन में भारत को कभी ओलंपिक पदक जीतते देखूंगा या नहीं. अब सारे मलाल मिट गए.’

भारत ने आखिरी बार मॉस्को में 1980 ओलंपिक में हॉकी का 8वां और आखिरी स्वर्ण पदक जीता था. टोक्यो में मनप्रीत सिंह की कप्तानी में टीम ने तीन बार की चैम्पियन जर्मनी को 5- 4 से हराकर कांसे का तमगा जीता.

उन्होंने सेमीफाइनल में बेल्जियम से मिली हार के बाद शानदार वापसी के लिए भारतीय टीम की तारीफ करते हुए कहा, ‘आप जब ओलंपिक में जाते हैं तो पदक जीतने के इरादे से ही जाते हैं. क्लासीफिकेशन मैच खेलने नहीं. भारतीय टीम की तारीफ करनी होगी कि बेल्जियम से 5-2 से हारने के तुरंत बाद उसने खुद को संभाला और आज इतनी जबर्दस्त हॉकी खेली.’

हूटर से 6 सेकंड पहले जर्मनी को मिले पेनल्टी कॉर्नर को भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने रोका और मैच को शूटआउट में जाने से बचाया. धनराज ने कहा, ‘मैं हमेशा से कहता आया हूं कि श्रीजेश बहुत बड़ा मैच विनर है. हरमनप्रीत सिंह और रूपिंदर पाल सिंह भी मैच जिताते आए हैं. इस टीम का हार नहीं मानने का जज्बा, जुझारूपन कमाल का है.’ उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी के लिए यह जीत बहुत मायने रखती है क्योंकि 41 साल इसके लिए इंतजार करना पड़ा है.

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Published Date: August 5, 2021 3:53 PM IST