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Tokyo Olympics 2020: सिल्वर से Ravi Dahiya को नहीं है संतोष, बोले- पेरिस में गोल्ड पर रहेगा फोकस
Tokyo Olympics 2020: रवि दहिया का मानना है कि विरोधी टीम का पहलवान उनसे बेहतर खेला. वो गोल्ड का हकदार था.
Tokyo Olympics 2020: टोक्यो ओलंपिक में भारत को रेसलिंग में सिल्वर मेडल जिताने वाले युवा रवि दहिया (Ravi Dahiya) फाइनल मुकाबले में हार से निराश नहीं हैं. उनका मानना है कि विरोधी खिलाड़ी उनसे बेहता था और जीत का हकदार था. रवि दहिया ने कहा कि वो पेरिस में होने वाले अगले ओलंपिक में गोल्ड लाने का प्रयास करेंगे.
रवि दहिया के एक मेडल के दम पर भारत के पास अब टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics 2020) में कुल पांच पदक हो गए हैं. शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम अगर अपना मैच जीत जाती है तो वो कांस्य पदक पक्का कर लेगी.
रवि दहिया (Ravi Dahiya) ने गुरुवार को पुरुष वर्ग के 57 किग्रा फाइनल के बाद पीटीआई से कहा कि यह सिल्वर मेडल उन्हें कभी संतोष नहीं देगा हालांकि उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिये काफी मायने रखता है.
रवि दहिया (Ravi Dahiya) ने जापान की राजधानी (Tokyo Olympics 2020) से फोन पर कहा, ‘‘मैं सिल्वर मेडल के लिये टोक्यो नहीं आया था. इससे मुझे संतुष्टि नहीं मिलेगी. शायद इस बार मैं रजत पदक का ही हकदार था क्योंकि युगुएव आज बेहतर पहलवान था. मैं जो चाहता था, वह हासिल नहीं कर पाया. ’’
दहिया (Ravi Dahiya) ने विश्व चैंपियन युगुएव के रक्षण को तोड़ने के लिये अपनी तरफ से भरसक प्रयास किया लेकिन रूसी पहलवान ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया. दो बार के मौजूदा एशियाई चैंपियन ने कहा, ‘‘उसकी शैली बहुत अच्छी थी. मैं अपने हिसाब से कुश्ती नहीं लड़ पाया. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कर सकता हूं. उसने बहुत चतुरता से कुश्ती लड़ी.’’
दहिया से जब पूछा गया कि उनका सिल्वर मेडल भारतीय कुश्ती के लिये क्या मायने रखता है तो वह उत्साहित हो गये. ‘‘वो तो ठीक है लेकिन सिल्वर मेडल लेकर चुप नहीं बैठ सकता. मुझे अपनी एकाग्रता बनाये रखनी होगी और अपनी तकनीक पर काम करना होगा तथा अगले ओलंपिक खेलों के लिये तैयार रहना होगा.’’
रवि दहिया ने कहा, ‘‘मेरे गांव ने तीन ओलंपियन दिये हैं और वह मूलभूत सुविधाओं का हकदार है. मैं नहीं बता सकता कि पहले क्या चाहिए. गांव को हर चीज की आवश्यकता है. हर चीज महत्वपूर्ण है चाहे वह अच्छे स्कूल हों या खेल सुविधाएं.’’
दहिया का गांव नाहरी दिल्ली से 65 किमी दूर है लेकिन वहां अब भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है.
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