टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारत को पहला मेडल दिलाने वालीं स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने यहां रजत पदक (Tokyo Olympic Mirabai Chanu Silver Medel) जीतने के बाद कहा कि वह इस जीत से बेहद खुश हैं. वह बीते 5 सालों से यह सपना देख रही थीं, जो आखिरकार सच हुआ. उन्होंने कहा, ‘मैं इस पर गर्व महसूस कर रही हूं.’Also Read - पाकिस्तान के पीएम का दर्द, बोले- हमें भिखारी न समझें, कटोरा लेकर हाथ फैलाने के लिए मजबूर न किया जाए

चानू (Mirabai Chanu) ने कहा कि उनकी निगाहें स्वर्ण पदक पर ही थीं लेकिन रजत पदक जीतना भी उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. बता दें चानू ने इससे पहले साल 2016 में रियो ओलंपिक में भी हिस्सा लिया था. लेकिन यहां उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था. तब मीराबाई (Mirabai Chanu) एक भी मौके पर वैलिड वजन नहीं उठा सकी थीं. तब वह पहली बार इतने बड़े मंच पर होने के चलते काफी नर्वस थीं. Also Read - करतारपुर में मिले भारत के महान पूर्व स्पिनर और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान, रोए-हंसे और गुनगुनाए

लेकिन इस बार पिछले अनुभव से सीख लेते हुए उन्होंने अपनी कामयाबी की गाथा लिख दी. इस कामयाबी के बाद अब वह ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वालीं देश की दूसरी वेटलिफ्टर हैं. इससे पहले साल 2000 में सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari) ने इस खेल से भारत की झोली में कांस्य पदक डाला था. Also Read - विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- भारत यूक्रेन संकट का समाधन कराने के लिए हर तरह की कोशिश को तैयार

करियर की सबसे शानदार जीत के बाद चानू (Mirabai Chanu) ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं, मैं पिछले 5 वर्षों से यह सपना देख रही थी. इस समय मुझे खुद पर गर्व महसूस हो रहा है. मैंने स्वर्ण पदक की कोशिश की लेकिन रजत पदक भी मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है.’ चानू पिछले कुछ महीनों से अमेरिका में ट्रेनिंग कर रही थीं.

यह पूछने पर कि मणिपुरी होने के नाते इसके क्या मायने है तो उन्होंने कहा, ‘मैं इन खेलों में भारत के लिए पहला पदक जीतकर बहुत खुश हूं. मैं सिर्फ मणिपुर की नहीं हूं, मैं पूरे देश की हूं.’