भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच शुअर्ड मरिने (Sjoerd Marijne) ने शुक्रवार को कहा कि ग्रेट ब्रिटेन के साथ टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) का कांस्य पदक मुकाबला उनका टीम के साथ आखिरी मैच था। मरिने के नेतृत्व में भारतीय महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक में अपने इतिहास का अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और टीम चौथे स्थान पर रही।Also Read - Tokyo Olympics में हारकर भी इतिहास रचने वाली भवानी देवी की तलवार हो सकती है आपकी! जानें पाने का तरीका

मरिने ने हॉकी इंडिया द्वारा आयोजित वर्चुअल प्रेस र्वाता में कहा, “मेरा कोई प्लान नहीं है, क्योंकि ये मेरा भारतीय महिला टीम के साथ आखिरी मैच था। ये अब टीम के विश्लेषणात्मक कोच जानेके स्कूपमैन पर है। मैं लड़कियों को मिस करूंगा लेकिन मैं अपने परिवार को ज्यादा मिस करता हूं।” Also Read - नीरज चोपड़ा, सुमित अंतिल की सफलता के बाद क्रिकेट जितना लोकप्रिय होगा भालाफेंक: अनुराग ठाकुर

उन्होंने कहा, “मेरा परिवार नंबर-1 प्राथमिकता है। मैं साढ़े तीन साल के बाद अपने बेटे, बेटी और पत्नी के साथ रहना चाहता हूं। इस सफर को खत्म करने का ये बेहतरीन तरीका है।” Also Read - उत्कृष्टता हासिल करने के लिए विराट कोहली को फॉलो करना चाहते हैं पीआर श्रीजेश

मरिने का करार टोक्यो 2020 तक था लेकिन ओलंपिक के एक साल स्थगित होने की वजह से इसे बढ़ाया गया था। मरिने को पहली बार फरवरी 2017 में मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। इसके बाद वह पुरुष टीम के कोच बने और उनकी जगह हरेंद्र सिंह को महिला टीम का कोच बनाया गया।

पुरुष टीम के ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर रहने के बाद 2018 में उन्हें दोबारा महिला टीम का कोच बनाया गया। मरिने के नेतृत्व में महिला टीम ने 2018 महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीता। 2019 में टीम ने एफअईएच ओलंपिक क्वालीफायर्स में अमेरिका को 6-5 से हराकर टोक्यो के लिए क्वालीफाई किया।