पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम का पेस अटैक टीम की सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उबर कर सामने आया है। 2018-19 सीजन में इसी तेज गेंदबाजी अटैक के दम पर टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती थी। हालांकि मजबूत पेस अटैक होने का मतलब है कि कुछ गेंदबाजों को मैच-फिट होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ता है, ऐसे खिलाड़ियों में पहला नाम है- उमेश यादव (Umesh Yadav) का। Also Read - CISCE 10th, 12th Syllabus: सीआईएससीई ने 10वीं,12वीं के सिलेबस में 25% की कटौती की, पढ़ें पूरी डिटेल्स

यादव ने टीम के अंदर से ज्यादा समय बाहर बिताया है। हालांकि उन्हें जब भी आखिरी 11 खिलाड़ियों में शामिल होने का मौका मिला, उन्होंने अपनी प्रतिभा से मैच पर प्रभाव डाला। यादव उन खिलाड़ियों में से हैं जिन्हें पता है कि खेल से दूर रहने का मानसिक प्रभाव कैसा होता है और उससे किस तरह निपटा जा सकता है। मौजूदा हालातों में जब कोविड-19 महामारी की वजह से सभी भारतीय क्रिकेटर घर बैठे हैं तो उमेश की ये सलाह उनके काम भी आ सकती है। Also Read - DU Admission 2020 Date: डीयू ने एडमिशन के लिए पंजीकरण प्रक्रिया की बढ़ाई डेट, जानें यहां कब तक कर सकते हैं अप्लाई 

पीटीआई से बातचीत में 32 साल के इस गेंदबाज ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मैं मानसिक रूप से काफी मजबूत हूं और इससे काफी फर्क पड़ता है। मैं इन चीजों को ज्यादा तवज्जो नहीं देता कि किसे खेलने का मौका मिलेगा या मुझे रिजर्व खिलाड़ियों में बैठना पड़ेगा। ये खेल है जहां कुछ भी संभव है।’’ Also Read - LAC पर गरज रहे सुखोई और जगुआर, वायुसेना के अधिकारी ने कहा- आसमान जितना हाई है जवानों का जोश

भारत की ओर से 46 टेस्ट में 144 और 75 वनडे में 106 विकेट हासिल करने वाले इस तेज गेंदबाज ने कहा, ‘‘कई चीजें इसमें मायने रखती हैं- फॉर्म, हालात। ये प्रदर्शन करना और मौके का फायदा उठाने से जुड़ा है। इसलिए मैं अन्य चीजों के बारे में काफी नहीं सोचता।’’

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अधिक मैच नहीं मिलने के कारण क्या वो खुद को पीड़ित समझते हैं, ये पूछे जाने पर उमेश ने कहा, ‘‘नहीं, मैं अपने आपको पीड़ित के रूप में नहीं देखता। ऐसा समय आता है जब मुझे खेलने का मौका मिला है और ऐसा समय भी होता है जब मैं नहीं खेलता। जब मैं खेल नहीं रहा होता तो मैं अपने खेल पर काम करने की कोशिश करता हूं। मेरा कौशल बेहतर हो रहा है और उम्मीद करता हूं कि मैं सीमित ओवरों की क्रिकेट का हिस्सा रहूंगा।’’

ये पूछने पर कि वो मुश्किल समय में किस व्यक्ति से बात करना पसंद करते हैं, उमेश ने कहा, ‘‘कोई एक व्यक्ति नहीं है जिससे मैं सलाह लेता हूं। ज्ञान हर जगह उपलब्ध है। आपको इसे ग्रहण करने के लिए तैयार रहना चाहिए। घर में मैं अपने कोच पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज सुब्रतो बनर्जी से सलाह लेता हूं। इसके अलावा आशीष भाई (नेहरा) और जहीर भाई भी हैं जिन्होंने मेरी काफी मदद की है।’’

कोविड-19 लॉकडाउन के बाद से उमेश अपनी पत्नी तान्या के साथ दिल्ली में अपनी ससुराल में ही हैं। उमेश ने कहा, ‘‘जहां मैं रह रहा हूं वहां से लगभग 350 मीटर की दूरी पर मैदान है और पिछले कुछ दिनों से मैं दौड़ने के लिए वहां जा रहा हूं।’’

भारत को दिसंबर में टेस्ट क्रिकेट खेलना है और उमेश को संभवत: सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिले और ऐसे में ये तेज गेंदबाज किसी भी टूर्नामेंट में खेलने के लिए तैयार है, फिर यह चाहे जिला स्तर के मैच हों या नागपुर में क्लब मैच जिससे कि वो फिट रह सकें। उमेश साथ ही इंग्लैंड में भी खेलना चाहते हैं लेकिन उन्हें पता है कि इस साल ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।