विराट कोहली (Virat Kohli) और स्टीव स्मिथ (Steve Smith), मौजूदा क्रिकेट के दो सबसे बेहतरीन बल्लेबाज। दोनों ही खिलाड़ी विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की सूची की ओर तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन उनके रास्ते अलग हैं। भारतीय कप्तान और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सफलता के मामले में भले ही एक दूसरे के बराबर हो लेकिन उनके खेलने का तरीका और उसके पीछे की प्रेरणा अलग है। ऐसा कहना है स्मिथ के साथ ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डेविड वार्नर (David Warner) का। Also Read - B’day Special: वो कोच जिसके मार्गदर्शन में टीम इंडिया ने 71 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में जीती पहली टेस्ट सीरीज

वार्नर मानते हैं कि कोहली और स्मिथ दोनों ही अपनी अपनी टीमों का मनोबल बढ़ाते हैं लेकिन उनकी बल्लेबाजी का जज्बा और जुनून एक दूसरे से अलग है। उन्होंने कहा कि कोहली विपक्षी टीम को कमजोर करने के लिए रन बनाने हैं जबकि स्मिथ अपनी बल्लेबाजी का लुत्फ उठाते हैं। Also Read - इंग्लिश ऑलराउंडर ने MS Dhoni के जज्बे पर उठाए सवाल, वर्ल्ड कप में हार का ठीकरा इन 3 भारतीयों के सिर फोड़ा

वार्नर ने हर्षा भोगले से ‘क्रिकबज इन कनवरसेशन’ में बात करते हुए कहा, ‘‘विराट का रन बनाने का जुनून और जज्बा स्टीव की तुलना में अलग है। स्टीव क्रीज पर गेंद को हिट करने के लिए जाता है, वो ऐसे ही चीजों को देखता है। वो क्रीज पर जमकर गेंदों को हिट करना चाहता है, वो आउट नहीं होना चाहता। वो इनका आनंद लेता है।’’ Also Read - 'भारतीय तेज गेंदबाज असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, मुझे कोई खामी नहीं दिखाई देती'

उन्होंने कहा, ‘‘विराट निश्चित रूप से आउट नहीं होना चाहता लेकिन वो जानता है कि अगर वो कुछ समय क्रीज पर बिताएगा तो वो तेजी से काफी रन जुटा लेगा। वो आप पर हावी होने की कोशिश करेगा। इससे आने वाले खिलाड़ी को मदद मिलती है, भारतीय टीम के बहुत से खिलाड़ी हैं जो शानदार हो सकते हैं।’’

ऑस्ट्रेलिया के इस सलामी बल्लेबाज ने साथ ही कहा कि दोनों खिलाड़ी मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं और अगर वे एक अच्छी पारी खेलते हैं तो इससे पूरी टीम का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘जब क्रिकेट की बात आती है तो दोनों मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं। दोनों क्रीज पर समय बिताकर रन जुटाना पसंद करते हैं।’’

वार्नर ने कहा, ‘‘अगर वो रन जुटाते हैं तो उनका मनोबल बढ़ने के साथ पूरी टीम का भी मनोबल बढ़ता है। अगर वो सस्ते में आउट हो जाते हैं तो मैदान पर सभी को ऐसा महसूस होता है कि अब हम सभी को अच्छा करना होगा। ये बहुत ही अलग स्थिति होती है।’’