नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराकर पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने का टीम इंडिया के पास इस बार सबसे सुनहरा मौका है. ये मौका सुनहरा इसलिए नहीं है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम में स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर या फिर कैमरून बैनक्रॉफ्ट शामिल नहीं है और न ही ये मौका आसान है विराट कोहली की वजह से, जो इस वक्त पूरी दुनिया में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाए बैठे हैं. दरअसल, टीम इंडिया के पास ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने का ये गोल्डन चांस है उसके तेज गेंदबाजों यानी कि पेस बैटरी की बदौलत. भारतीय टीम इस बार 5 तेज गेंदबाजों के साथ टेस्ट सीरीज खेलने ऑस्ट्रेलिया पहुंची है, जिनमें से 4 के पास वहां पहले भी टेस्ट खेलने का अनुभव है.

पहले नहीं दिखी ऐसी धार

पहले के ऑस्ट्रेलिया दौरों से तुलना की जाए तो टीम इंडिया का मौजूदा पेस अटैक काफी जुदा है. ये फर्क इनके परफॉर्मेन्स से भी साफ हो जाता है. इनमें धार है, रफ्तार है और इनका अंदाज और मिजाज ऑस्ट्रेलिया की पिचों से मेल खाता है. सबसे बड़ी बात कि इनमें जीत की भूख है और अपने कप्तान की ही तरह इन्हें भी चैलेंज पसंद है. भारतीय गेंदबाजों का जैसा प्रदर्शन साल 2018 में देखने को मिला वैसा पहले कभी नहीं दिखा. भारतीय तेज गेंदबाजों ने मिलकर इस साल अब तक 132 विकेट झटके हैं, जो कि एक रिकॉर्ड है. इससे पहले भारतीय तेज गेंदबाजों का बंच में बेहतरीन प्रदर्शन साल 1979 में देखने को मिला था जब उन्होंने 125 विकेट हासिल किए थे.आईए एक नजर डालते हैं विराट की टीम के पेस अटैक के उन 5 चेहरों पर, जिन्हें देखकर लगता है इस बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीत का ख्वाब पूरा होकर रहेगा.

जसप्रीत बुमराह

भारतीय पेस अटैक के 5 चेहरों में जसप्रीत बुमराह इकलौते हैं जिनके पास ऑस्ट्रेलिया में खेलने का अनुभव नहीं है. साल 2016 में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले बुमराह को टेस्ट डेब्यू का मौका इसी साल साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में मिला. इस मौके को लपकने में बुमराह ने कोई कसर नहीं छोड़ी. बुमराह ने अपने करियर में अब तक 6 टेस्ट खेले हैं जिसमें 25.57 की औसत से 28 विकेट चटकाए हैं. इसमें 2 बार 5 विकेट लेने का कमाल भी शामिल है.

pjimage (5)

बुमराह की ताकत उनकी सटीक यॉर्कर और उनकी 140 प्लस की स्पीड है. गेंदबाजी का ये मिजाज बाउंस और पेस वाली ऑस्ट्रेलियाई पिचों के लिए परफेक्ट है. यानी, अपने घर में खेलने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के लिए खतरे की घंटी है.

मोहम्मद शमी

गेंद जब पुरानी हो जाए तो शमी की गेंदबाजी का असली आर्ट देखने को मिलता है. एक ऐसा आर्ट जो विरोधी टीमों की नाक में दम कर देता है उन्हें घूटने टेकने पर मजबूर कर देता है. पुरानी गेंद से शमी की इस कलाबाजी का नाम है रिवर्स स्विंग.

pjimage (9)

दाएं हाथ के इस अनुभवी तेज गेंदबाज के हाथ से छूटने के बाद गेंद जब हवा में लहराती है तो उसके मूवमेंट को भांप पाना अच्छे अच्छे बल्लेबाजों के लिए मुश्किल हो जाता है. अपनी इसी ब्यूटी के दम पर शमी ने इस साल 27.60 की औसत से 33 विकेट चटकाए हैं.

हालांकि, अगस्त- सितंबर में खेले इंग्लैंड के दौरे पर उनका प्रदर्शन उनके दमखम के मुताबिक नहीं रहा था, जहां वो 38.87 की औसत से 5 टेस्ट की सीरीज में सिर्फ16 विकेट ही ले सके थे. लेकिन इस साल की शुरुआत में साउथ अफ्रीका में खेली टेस्ट सीरीज में शमी ने 3 टेस्ट की सीरीज में 17.06 की औसत से 15 विकेट अपने नाम किए थे और वो रबाडा और फिलेंडर के साथ सीरीज के लीडिंग विकेटटेकर भी रहे थे.

भुवनेश्वर कुमार

शमी अगर पुरानी गेंद से कहर बरपाने में माहिर हैं तो भुवी के अंदर वो हुनर नई गेंद से दिखती है. हमारा मतलब गेंद को स्विंग कराने से है. क्रिकेट पंडित मानते हैं कि अगर भुवी फिट होते तो भारत इस साल इंग्लैंड दौरे पर 1-4 से सीरीज नहीं गंवाता. लेकिन, इंजरी ने भुवी को इंग्लैंड दौरे से बाहर कर दिया. भुवी ने साल 2018 में सिर्फ 2 टेस्ट साउथ अफ्रीका के खिलाफ उसी की धरती पर खेले, जिसमें उन्होंने 20.30 की औसत से 10 विकेट चटकाए.

pjimage (8)

भुवी का 2015 का ऑस्ट्रेलिया दौरा टेस्ट के लिहाज से कुछ खास नहीं रहा था जहां उन्होंने 168 रन लुटाकर सिर्फ 1 विकेट चटकाए थे. लेकिन तब से अब तक वो काफी परिपक्व हो चुके हैं. गेंद को सीम के साथ स्विंग कराने में मंझ चुके हैं और अपनी स्पीड को भी बढ़ा लिया है. और, ये कहीं से भी मेजबानों के लिए अच्छी खबर नहीं है.

ईशांत शर्मा

ईशांत ने अपने टेस्ट करियर में अब तक 34. 37 की औसत से 256 विकेट चटकाए हैं. 200 से ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाजों में ईशांत का औसत सबसे खराब है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि उन्हें नजरअंदाज किया जाए. ये आंकड़ा देखिए.

ईशांत ने पिछले 12 महीनों में 23.09 की औसत से 33 टेस्ट विकेट चटकाए हैं. इस दौरान तेज गेंदबाजों में उनसे बेहतर औसत सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंस का ही रहा है. इसके अलावा ईशांत के पास भारत के पांचों तेज गेंदबाजों में ऑस्ट्रेलिया में गेंदबाजी के सबसे ज्यादा अनुभव है. 2007-08 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर युवा ईशांत ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों खासकर रिकी पॉन्टिंग को खूब परेशान किया था.

pjimage (6)

ईशांत का मौजूदा फॉर्म भी कुछ वैसा ही है. इस साल इंग्लैंड के दौरे पर 5 टेस्ट की सीरीज में उन्होंने 24.27 की औसत से 18 विकेट चटकाए. अब अपने परफॉर्मेन्स की उसी धार और रफ्तार को वो ऑस्ट्रेलियन सरजमीं पर भी बरकरार रखना चाहेंगे.

उमेश यादव

ये विराट के सबसे तेज हथियार हैं. मतलब ये कि भारत के तेज गेंदबाजों में सबसे ज्यादा स्पीड इन्हीं के पास है. यानी, ऑस्ट्रेलियाई धरती पर जो काम शमी की रिवर्स स्विंग, भुवी की स्विंग, बुमराह की यॉर्कर और ईशांत का अनुभव न कर सकेगा वो काम उमेश की स्पीड करती दिखेगी.

pjimage (7)

साल 2018 में टेस्ट क्रिकेट में उमेश मे 16.05 की औसत से 18 विकेट चटकाए हैं. उमेश का ये रिकॉर्ड तब है जब उन्होंने इस साल खेले 4 टेस्ट में से 3 भारत की धीमी पिच पर खेले हैं. उमेश ने अपने टेस्ट करियर में पहली बार 5 विकेट ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर ही लिए हैं. ये कमाल उन्होंने 2011 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर किया था. 7 साल बाद उमेश एक बार फिर से कंगारुओं की धरती पर हैं. पिछले साल ऑस्ट्रेलिया ने जब भारत का दौरा किया था तो उन्होंने टेस्ट सीरीज में 23.41 की औसत से 17 विकेट चटकाए थे. इस साल भारत ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है और उमेश एक बार फिर से भारत की बड़ी उम्मीद हैं.