नई दिल्ली. क्रिकेट के कई रंग आपने देखे होंगे. लेकिन, इस खेल का जो अंदाज बनारस की गलियों में दिखा, वो सचमुच सबसे अलग और सबसे निराला है. क्रिकेट के बनारसी रूप-रंग को देखकर लगता ही नहीं कि ये खेल दुनिया को गोरों यानी अंग्रेजों की देन रही होगी. जेन्टलमैन गेम के नाम से मशहूर क्रिकेट बनारस में पूरी तरह से भारतीय रंग में घुला था. दरअसल, बनारस में जो क्रिकेट खेला गया उसमें क्रिकेटर धोती-कुर्ता पहने थे. कमेंट्री की आवाज गूंज रही थी पर हिंदी या अंग्रेजी में नहीं बल्कि संस्कृत में. इस यूनिक क्रिकेट मैच की ये पूरी पिक्चर वहां मौजूद दर्शकों को लुभा रही थी और उनका दिल जीत रही थी.

बनारस के संपूर्णआनंद संस्कृत यूनिवर्सिटी के 75 साल पूरे होने पर एक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन का कराया गया, ये तस्वीर उसी के एक मुकाबले की है. 5 मैचों के इस क्रिकेट टूर्नामेंट में कुल 5 टीमों ने हिस्सा लिया. इस टूर्नामेंट को देखने आए दर्शक न सिर्फ खिलाड़ियों की पीली धोती-कुर्ता वाले पोशाक को देखकर रोमांचित थे बल्कि संस्कृत में हो रही कमेंट्री से भी गदगद थे.

बनारसी क्रिकेट ने जीता दिल

इस क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन अंतराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर नीलू मिश्रा और काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीकांत मिश्रा ने किया. इस मुकाबले में अंपायरिंग धीरज मिश्रा और संजीव तिवारी ने की. कुल मिलाकर क्रिकेट का बनारसी फ्लेवर हर किसी के दिलोदिमाग में पूरी तरह से घुला और दीवाना बना गया.