क्रिकेट के खेल में खिलाड़ी टीम को जीत दिलाने के लिए पूरी जान लगा देते हैं। एक खिलाड़ी अच्छे बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी व फील्डिंग करने में अपना कोई कसर नहीं छोड़ता है। ऐसा ही एक घटना है जब भारतीय खिलाड़ी अनिल कुंबले ने खेल भावना की अनूठी मिसाल कायम की। जी हाँ एंटीगुआ टेस्ट मैच 20 मई ,2002 को खेले गए एक मैच के दौरान अनिल कुंबले का जबड़ा गेंद लगने के कारण पूरी तरह से टूट गया था। उनका चेहरा पूरा लहूलुहान था और उनके चेहरे पर बैंडेज व पट्टियाँ बंधी थी। फिर भी उन्होंने अपने दर्द की परवाह ना करते हुए गेंदबाजी की। क्रिकेट के इतिहास में ये सबसे प्रेरणादायक पलों में से एक पल था। देश के लिए प्रेम और खेल भावना की ये अनूठी मिसाल थी जिसे अनिल कुंबले ने सबके सामने पेश किया था।

आइए जानते हैं पूरी घटना के बारे में –

बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज के खिलाड़ी मर्विन डिल्लन ने एक जोरदार शॉट लगाया जो सीधे अनिल कुंबले के जबड़े से आ लगी और उनके जबड़े से खून बहने लगा उनका खून गाल से होते हुए मैदान पर गिरने लगा। सभी को लग रहा था शायद अब इस मैच में अनिल कुंबले ना खेल पाए लेकिन 20 मिनट के बाद खेल शुरु हुआ और अनिल कुंबले की मैदान में वापसी हुई। ये भी पढ़ें: फिक्सिंग की सज़ा भुगत चुके इस पाकिस्तानी खिलाड़ी ने बना दिया नया वर्ल्ड रिकॉर्ड

कुंबले का चेहरा व जबड़ा बैंडेज व पट्टियों से बंधा था। अपने दर्द की परवाह ना करते हुए अनिल कुंबले ने अपनी गेंदबाजी को जारी रखा और ब्रायन लारा का अमूल्य विकेट भी लिया ।इसी के साथ अनिल कुंबले पहले ऐसे गेंदबाज हो गए थे जिन्होंने टूटे हुए जबड़ो के साथ दर्द की परवाह ना करते हुए ब्रायन लारा का विकेट लिया। फ़िलहाल भारत और वेस्टइंडीज का ये टेस्ट मैच 1-1 की बराबरी पर ख़त्म हुआ।

मैच के बाद महान क्रिकेटर सर विवियन रिचर्ड्स ने कहा “ ये एक बहादुरी भरा काम था जिसे मैंने मैदान पर देखा” ।