इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली प्रतिष्ठित एशेज टेस्ट (The Ashes 2021-22) सीरीज 8 दिसंबर से ब्रिसबेन के द गाबा स्टेडियम में खेली जानी है। इससे पहले हम आपको इतिहास में थोड़ा पीछे ले जाना चाहते हैं ताकि हम इस बेहतरीन टेस्ट सीरीज के अनोखे नाम के पीछे का कारण जान सकें।Also Read - ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वार्न ने बताया- क्यों अजिंक्य रहाणे नहीं बन सकते भारत के अगले टेस्ट कप्तान

क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता कही जाने वाली एशेज टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ‘अर्न’ ट्रॉफी के लिए एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। लेकिन इस ट्रॉफी को अर्न कहा क्यों जाता है। अर्न का हिंदी में मतलब होता है अस्थि-कलश। यानि ऐसा बर्तन जिसमें अस्थि या राख रखी जाती है। भला कोई क्रिकेट बोर्ड अपनी ट्रॉफी का ऐसा नाम क्यों रखेगा, इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है। Also Read - एशेज जीत के बाद विदेशों में अच्छा प्रदर्शन करना ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ी चुनौती: नाथन लियोन

एशेज की कहानी 1882 में शुरू हुई थी जब ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड को पहली बार उनके घर पर हराया था। ओवल के मैदान पर मिली सीरीज हार ने उस समय खेल जगत को झकझोर कर रख दिया और द स्पोर्टिंग टाइम्स अखबार ने इस पर चुटकी लेते हुए ‘इंग्लिश क्रिकेट की मौत’ हेडलाइन से एक लेख छापा था। Also Read - Ashes 2021-22: अंग्रेजों के खिलाफ 152 रन की पारी को ट्रेविस हेड ने बताया करियर बेस्‍ट, 'मैं यकीन नहीं कर पा रहा था'

(File photo)

आर्टिकल में लिखा गया, “इंग्लिश क्रिकेट की याद में जिसकी 29 अगस्त 1882 को ओवल में मौत हो गई। शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा और राख को ऑस्ट्रेलिया ले जाया जाएगा”

इसके बाद जब इंग्लैंड ने अगली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया तो वो राख असली हो गई – एक बेल को जलाया गया और उसकी राख को अब मशहूर अर्न ट्रॉफी में रखा गया।

जीतने वाले खिलाड़ियों को जश्न मनाने के लिए उस अर्न की एक प्रतिकृति दी जाती है, क्योंकि असली ट्रॉफी बहुत नाजुक है। 100 से ज्यादा सालों के बाद भी असली अर्न ट्रॉफी लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) संग्रहालय में रखी है।