कमांडो, ड्रोन और AI कैमरे... FIFA World Cup की सुरक्षा देखकर रह जाएंगे हैरान
FIFA World Cup सिर्फ फुटबॉल का टूर्नामेंट नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे जटिल और विशाल सुरक्षा अभियानों में से एक होता है. स्टेडियम के गेट से लेकर आसमान में उड़ रहे प्लेन तक, हर स्तर पर निगरानी रखी जाती है
11 अमेरिकी शहरों में फुटबॉल वर्ल्ड कप के 78 मुकाबले होने हैं. इस दौरान स्टेडियम के ऊपर या पास ड्रोन उड़ाने के लिए जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जा रही है. (AI जेनरेटेड)
फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन यानी FIFA वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 12 जून से हो रही है. इसबार अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा को टूर्नामेंट की मेजबानी मिली है. फुटबॉल वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में कुल 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं. इस टूर्नामेंट को सफल बनाने के लिए कड़े सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं. खास तौर से अमेरिका में सुरक्षा के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा. नियम तोड़ने वालों को 1 लाख डॉलर का जुर्माना भरना होगा.
FIFA World Cup सिर्फ फुटबॉल का टूर्नामेंट नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे जटिल और विशाल सुरक्षा अभियानों में से एक होता है. स्टेडियम के गेट से लेकर आसमान में उड़ रहे प्लेन तक, हर स्तर पर निगरानी रखी जाती है. हजारों सुरक्षाकर्मी, एडवांस टेक्नोलॉजी, ड्रोन, CCTV और साइबर सिक्योरिटी सिस्टम मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा खेल महाकुंभ सुरक्षित और सफल तरीके से अपने अंजाम तक पहुंचे.
अमेरिका में फीफा वर्ल्ड कप इवेंट के लिए सुरक्षा के कैसे इंतजाम?
- 11 अमेरिकी शहरों में फुटबॉल वर्ल्ड कप के 78 मुकाबले होने हैं. इस दौरान स्टेडियम के ऊपर या पास ड्रोन उड़ाने के लिए जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जा रही है.
- सुपर बाउल और दूसरे बड़े इवेंट के दौरान इस्तेमाल होने वाले एंटी ड्रोन सिस्टम को बढ़ा दिया गया है, जबकि एजेंसियों को ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से फेल करने या उन्हें मार गिराने के राइट्स दे दिए गए हैं.
- वहीं, फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन FIFA वर्ल्ड कप के मुकाबलों और फैन्स से जुड़े इवेंट के दौरान भीड़भाड़ वाले स्टेडियमों के आसपास और एयर स्पेस पर प्रतिबंध लगा देगा.
- न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट की कमिश्नर जेसिका टिश ने कहा, यूक्रेन युद्ध ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए टेस्टिंग का मैदान बन गया है. अगर कोई खतरा है, जो मुझे रात में सोने नहीं देता तो वह ड्रोन से है.’’
खिलाड़ियों की सुरक्षा सबसे अहम
दुनिया के बड़े फुटबॉल स्टार की सुरक्षा के लिए अलग प्रोटोकॉल बनाया जाता है. जहां टीमें ठहरी हैं, वहां के होटल की निगरानी, खिलाड़ियों की प्रैक्टिस के लिए सुरक्षा और लिमिटेड मीडिया एक्सेस इसमें शामिल है. खिलाड़ियों के होटल और उनके ट्रैवेल रूट को गोपनीय रखा गया है.
भीड़ को कंट्रोल करने के लिए खास रणनीति
एक बड़े मैच के दौरान एक ही स्टेडियम में 60,000 से 90,000 तक दर्शक मौजूद हो सकते हैं. इसलिए अलग-अलग एंट्री और एग्जिट गेट होंगे. इमरजेंसी एग्जिट गेट भी बनाया गया है. स्टेडियम में 5-5 मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी. एंबुलेंस का नेटवर्क होगा. क्राउड कंट्रोल एक्सपर्ट्स भी रहेंगे.
साइबर सुरक्षा भी बड़ी चुनौती
आज के दौर में खतरा केवल मैदान तक सीमित नहीं है. टिकटिंग सिस्टम, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और ऑफिशियल वेबसाइटों पर साइबर हमलों का खतरा भी बना रहता है. इसी वजह से FIFA और मेजबान देश स्पेशल साइबर सुरक्षा टीमों की मदद लेते हैं, जो हैकर हमलों को रोकने के लिए चौबीसों घंटे काम करती हैं.
हाईटेक कैमरों का जाल
इस बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए हजारों CCTV कैमरे लगाए गए हैं. इसके जरिए फेस रिकग्निशन, AI बेस्ड मॉनिटरिंग और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की जाएगी. सुरक्षा एजेंसियां रियल टाइम में पूरे स्टेडियम और उसके आसपास की गतिविधियों पर नजर रखती हैं.
FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन को मिलेंगे 476 करोड़
इस बार फीफा वर्ल्ड कप की प्राइज मनी 655 मिलियन अमेरिकी डॉलर है. भारतीय करेंसी में यह करीब 6240 करोड़ रुपये होता है. विजेता टीम को पिछली बार 42 मिलियन डॉलर मिले थे. इस बार 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 476 करोड़ रुपये मिलेंगे. परफॉर्मेंस-बेस्ड प्राइज मनी के अलावा क्वालिफाई करने वाले हर देश को क्वालिफिकेशन पेमेंट के रूप में 10 मिलियन डॉलर मिलेंगे. इसके बाद 2.5 मिलियन डॉलर तैयारी के लिए मिलेंगे. आखिरी नंबर पर रहने वाली टीम भी 21.5 मिलियन डॉलर लेकर जाएगी.
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