महिला विश्व चैंपियनशिप में पहली बार खेलने उतरीं हरियाणा की मुक्केबाज मंजू रानी को रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. इस तरह मंजू को सिल्वर पदक से संतोष करना पड़ा.

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मंजू रानी को लाइट फ्लाइवेट (48 किलो) वर्ग के फाइनल में रूस की एकातेरिना पाल्सेवा ने 4-1 से पराजित कर दिया. मौजूदा विश्व चैंपियनशिप में मंजू के रूप में एक मात्र भारतीय चुनौती बची हुई थी.

इससे पहले शनिवार को 6 बार की चैंपियन एम सी मैरीकॉम (51 किलो), जमुना बोरो (54 किलो) और लवलीना बोरगोहेन (69 किलो) को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था. बोरगोहेन का यह लगातार दूसरा कांस्य पदक था.

रानी और उनकी प्रतिद्वंद्वी ने पहले दौर से ही आक्रामक खेल दिखाया. पहले तीन मिनट में रूसी मुक्केबाज ने दमदार मुक्के लगाए.

दूसरे दौर में रानी ने अच्छे जवाबी हमले किए और स्थानीय मुक्केबाज पर भारी पड़ी. आखिरी तीन मिनट में दोनों ने संभलकर खेला. पांच जजों ने मेजबान रूस की खिलाड़ी के पक्ष में 29-28, 29-28, 30-27, 30-27, 28-29 से फैसला सुनाया. रूसी मुक्केबाज को बेहतर रिफ्लैक्सेस के कारण विजेता घोषित किया गया.

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रानी ने इस साल पंजाब के लिए राष्ट्रीय खिताब जीतकर राष्ट्रीय शिविर में जगह बनाई थी. उन्होंने इस साल पहली बार स्ट्रांजा मेमोरियल टूर्नामेंट खेलते हुए रजत पदक जीता था.

रोहतक के रिठाल फोगाट गांव की रहने वाली रानी के पिता सीमा सुरक्षा बल में अधिकारी थे जिनका कैंसर के कारण 2010 में निधन हो गया था.

18 साल बाद यह पहला मौका है जब किसी भारतीय महिला मुक्केबाज ने अपने पदार्पण विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता हो. इससे 18 साल पहले एमसी मैरीकॉम ने अपने डेब्यू टूर्नामेंट में रजत पदक जीता था। भारत ने इस चैंपियनशिप में एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते.