नई दिल्ली. ओलंपिक में अपने दांव पेंच से भारत की चांदी करने वाले पहलवान सुशील कुमार का नाम ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के पहलवानों की लिस्ट में जोड़ लिया गया है. सुशील 74 किलो कैटेगरी में अपनी कुश्ती की नुमाईश करते हैं . लेकिन गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में इस कैटेगरी में लड़ने वाले रेसलर्स की लिस्ट से उनका नाम नदारद था. सुशील के लिस्ट में नाम ना होने के बाद काफी बवाल मचा और तब जाकर उनका नाम लिस्ट में जुड़ा. कॉमनवेल्थ की वेबसाइट में सुशील का नाम जुड़ने से अब इस ईवेंट में लड़ने वाले भारतीय पहलवानों की संख्या 16 हो गई है. Also Read - कोरोना के डर से महिला पहलवान विनेश फोगाट ने नेशनल कैंप से किया किनारा, WFI नाराज

बवाल के बाद जुड़ा सुशील का नाम Also Read - पीवी सिंधु: ओलंपिक में इतिहास रचने वाली भारतीय खिलाड़ी के शानदार करियर पर एक नजर

दरअसल, हुआ ये था कि गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स की ऑफिशिएल वेबसाइट पर 74 किलोग्राम कैटेगरी में सुशील के नाम पर एंट्री ही नहीं थी. इसके बाद सुशील के पर्सनल कोच ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सभी कैटेगिरियों के पहलवानों के नाम वेबसाइट पर दर्ज हैं तो सिर्फ सुशील का नाम ही नदारद क्यों है ? सुशील के कोच के अलावा उनके फैंस ने भी भारतीय पहलवानों की लिस्ट में उनका नाम नहीं होने पर गुस्सा जताया. इन तमाम सवाल और बवाल के बाद IOC ने लिस्ट में सुशील का नाम जोड़ा, जिसके बाद उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के अखाड़े में अपना दमखम दिखाने का लाइसेंस हासिल हुआ. Also Read - डोपिंग के कारण सस्पेंड हुई थी 2 बार की Commonwealth Games गोल्ड मेडलिस्ट वेटलिफ्टर, अब शामिल होगी इस अवॉर्ड की दौड़ में

सुशील के ‘सुनहरे’ दांव

कुश्ती के अखाड़े में सुशील के दो बड़े दांव 2008 के बीजिंग और 2012 के लंदन ओलंपिक में देखने को मिले . बीजिंग ओलंपिक में सुशील ने ब्रॉन्ज पर दांव लगाया था जबकि लंदन में उसके रंग को बदलकर सिल्वर किया था. ओलंपिक के अखाड़े में मिली इन दो सबसे बड़ी कामयाबियों के अलावा सुशील कुमार साल 2010 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सुनहरा दांव भी लगा चुके हैं. इंजरी और विवादों की वजह से सुशील साल 2016 के रियो ओलंपिक में शिरकत नहीं कर सके थे. रियो ओलंपिक में शिरकत ना कर पाने के मलाल को सुशील अब ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में दूर करना चाहेंगे, जो कि उसके बाद उनका सबसे बड़ा टूर्नामेंट है.

कॉमनवेल्थ के लिए PWL में नहीं लड़े

कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों की वजह से ही सुशील PWL यानी प्रो-रेसलिंग लीग में भी अपना दांव टीम में शामिल होने के बावजूद नहीं दिखा पाए थे. दरअसल, उस वक्त वो इंजरी से रिकवर कर रहे थे और वो नहीं चाहते थे कि मैट पर उनका एक गलत दांव उनके कॉमनवेल्थ खेलने की उम्मीदों को चकनाचूर कर दे. इसमें कोई दो राय नहीं कि सुशील भारतीय कुश्ती के सबसे बड़े नाम हैं. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स के इस ईवेंट में वो भारत के लिए सोने के तमगे की गारंटी भी है. ऐसे में जब उनका नाम पहलवानों की उस लिस्ट से नदारद दिखा जिसके वो भी हकदार थे तो हल्ला तो मचना ही था और जब सवाल उठे तो जवाब के तौर पर IOC को उनका नाम लिस्ट में जोड़ना पड़ा.