नई दिल्ली : युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने मंगलवार को स्वीकार किया कि वह कभी कभी अपने बेटे के प्रति कठोर थे क्योंकि वे कुछ साबित करना चाहते थे और उन्हें हमेशा अपने बेटे पर गर्व रहेगा. युवराज ने सोमवार को उतार चढ़ाव से भरे अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत किया. इस दौरान उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ लम्हा 2011 विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाना रहा. Also Read - IPL 2021, CSK vs RCB: एक ही ओवर में लुटे 37 रन, क्रिकेट मैदान पर Ravindra Jadeja का तूफान

Also Read - IPL 2021: Yuvraj Singh बोले- सनराइजर्स के खिलाफ पोलार्ड नहीं Hardik Pandya मैन ऑफ द मैच

भारत के लिए एक टेस्ट और छह वनडे मैच खेलने वाले योगराज ने कहा, ‘‘मैं कृतज्ञ हूं कि मेरा उसके जैसा बेटा है. मैं अपने बेटे को धन्यवाद देता हूं और मैं हमेशा उसे (युवराज) कहता हूं कि मुझे उस पर गर्व है.’’ Also Read - Ab de Villiers को नंबर-5 पर बल्‍लेबाजी करते देख नाराज हो गए युवराज सिंह, Virat Kohli ने मैच के बाद दी सफाई

योगराज के जोर देने पर ही युवराज ने क्रिकेट को करियर के रूप में चुना था. उन्होंने कहा, ‘‘अगर तुम्हें (युवराज) लगता है कि मैं तुम्हारे प्रति कठोर था, मैं लोगों को कुछ साबित करना चाहता था और मैं उम्मीद करता हूं कि तुम इसे समझ सकते हो.’’

धवन टीम इंडिया से बाहर, जानें चोट की वजह से कितने मैचों में नहीं खेलेंगे शिखर

युवराज के अपने पिता के साथ रिश्ते काफी अच्छे नहीं थे और बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि वह उसके लिए ‘ड्रैगन’ की तरह थे. अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लेने से ठीक पहले हालांकि युवराज अपने पिता के साथ सुलह करने में सफल रहे.

योगराज ने कहा कि शुरुआती दिनों में वह हमेशा चाहते थे कि युवराज ‘बंबई’ जाए और मुंबई में खेलने से यह आक्रामक आलराउंडर ‘अच्छे क्रिकेटर’ में बदलने में सफल रहा. उन्होंने अपने और अपने बेटे के करियर में मदद के लिए जाने माने लेखक मकरंद वायंगणकर का भी आभार जताया.

पीटरसन ने टीम इंडिया को दिया सुझाव, धवन की जगह इस खिलाड़ी को दो मौका

युवराज को जब राष्ट्रीय टीम में जगह मिली तब चयनकर्ता की भूमिका निभा रहे पूर्व भारतीय बल्लेबाज चंदू बोर्डे ने इस क्रिकेटर को निडर व्यक्ति करार दिया जो अन्य लोगों के लिए प्रेरणा है. उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिकूल शारीरिक समस्याओं के बावजूद उसने स्वयं को जिस तरह फिट रखा और उन समस्याओं से उबरा उसके लिए उसे सलाम है. उसने दूसरों को दिखाया कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और अंत तक उसने संघर्ष जारी रखा. उसने देश और अपने राज्य के लिए जिस तरह का प्रदर्शन किया उस पर मुझे खुशी है.’’