भारतीय पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास तो ले लिया था मगर कभी इस फैसले की वजह नहीं बताई. हालही में, एक कार्यक्रम के दौरान युवराज ने इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी और ऐसी कई बातें बताईं जिससे एक बार फिर भारतीय क्रिकेट प्रबंधन शक के घेरे में आ गया है. यो-यो टेस्ट पास करने के बावजूद युवराज को भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं चुना गया और उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए कहा गया. 37 वर्षीय युवराज ने इस मामले में भारतीय क्रिकेट चयन समिति पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सेलेक्शन के समय निष्पक्ष रुख अपनाने की आवयश्कता थी.

युवराज ने खुलासा किया कि टीम प्रबंधन में से किसी ने भी उन्हें यह नहीं बताया कि सीनियर खिलाड़ियों पर युवाओं को तरजीह दी जाएगी. उन्होंने कहा,”कभी नहीं सोचा था कि चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के बाद खेले गए 8-9 मैचों में से 2 मैचों में मैन ऑफ द मैच बनने के बाद भी मुझे टीम में शामिल नहीं किया जाएगा. उसके बाद मैं चोटिल हो गया और मुझे श्रीलंका सीरीज की तैयारी के लिए कहा गया”.

yuvraj singh

युवराज सिंह

अपने साथ हुए नाइंसाफी को याद करते हुए युवराज ने बताया कि, “ये यो-यो टेस्ट मेरे करियर का यू टर्न साबित हो गया. अचानक मुझे 36 साल की उम्र में यो-यो टेस्ट के लिए वापस जाना पड़ा और तैयारी करनी पड़ी. यहां तक कि मेरे यो-यो टेस्ट क्लियर करने के बाद भी मुझे घरेलू क्रिकेट खेलने को कहा गया. उन्होंने वास्तव में सोचा था कि मैं अपनी उम्र के कारण परीक्षण को मंजूरी नहीं दे पाऊंगा जिससे मुझे बाद में इसे अस्वीकार करने में आसानी होगी… हाँ, आप कह सकते हैं कि यह बहाना बनाने की एक कवायद थी जो हमेशा से चलती आ रही है”.

भारतीय क्रिकेट के इस दिग्गज ने वर्ल्ड टी-20 2007 और वर्ल्ड कप 2011 में अपने बल्ले और अपनी गेंद से एक अहम भूमिका निभाई थी. साल 2007 के उद्घाटन वर्ल्ड टी-20 के दौरान, युवराज ने स्टुअर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर छह छक्के लगाकर अपनी कौशलता का प्रमाण दे दिया था.