नई दिल्ली : युवराज सिंह ने मुश्किलों से कभी हार नहीं मानी. इस जिंदा दिल क्रिकेटर के 25 साल के करियर में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन वो कभी हालातों के आगे झुका नहीं. युवराज ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वकप 2011 में ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे. लेकिन अब इस दिग्गज खिलाड़ी ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया. युवराज ने सोमवार को संन्यास की घोषणा की. इस दौरान युवी ने बताया कि उनके जिंदगी का सबसे बड़ा अफसोस क्या रहा.

टीम इंडिया के भरोसेमंद ऑलराउंडर खिलाड़ी युवराज ने सोमवार को प्रेसकॉन्फ्रेंस आयोजित की. इसमें युवराज से पूछा गया कि आपके जिंदगी का सबसे बड़ा अफसोस क्या है. युवी ने जवाब देते हुए कहा कि ऐसा कुछ बहुत बड़ी बात नहीं है जिस पर अफसोस किया जा सके. हालांकि उन्होंने टेस्ट मैच का जिक्र करते हुए कहा, मुझे कैंसर हो गया. कैंसर होने का मतलब है कि आसमान पर बैठे किस आदमी को जमीन पर ला देना. कैंसर होने के बाद मैं टेस्ट मैच नहीं खेल पाया. मुझे इस बात का अफोसस रहा कि मैंने टीम इंडिया के लिए ज्यादा टेस्ट मैच नहीं खेले.’

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युवी ने टीम इंडिया के लिए पहला टेस्ट मैच अक्टूबर 2003 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला. इसके बाद उन्होंने कई मैचों में शानदार प्रदर्शन किया. युवी ने कुल 62 टेस्ट पारियों में 1900 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 3 शतक और 11 अर्धशतक जड़े. युवी ने टेस्ट मैचों में 9 विकेट भी लिए हैं. उन्होंने अपने करियर का आखिरी टेस्ट मैच दिसंबर 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला. यह मुकाबला कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला गया, जिसमें इंग्लैंड ने 7 विकेट से जीत हासिल की.