उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के तुरंत बाद ये सवाल खड़ा हो गया कि सूबे का सीएम कौन होगा। दरअसल, चुनाव के दौरान बीजेपी ने सीएम चेहरे पर कोई घोषणा नहीं की थी, पूरा चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी के चमत्कारी भाषणों के इर्दगिर्द घूमता रहा। लेकिन अब जब कि पार्टी ने चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल किया है, तो सीएम बनाए जाने का सवाल सबसे बड़ा है। सीएम की दौड़ में इन दिनों मनोज सिन्हा एक ऐसा नाम है, जिसे  मोदी और अमित शाह के काफी करीबी माने जाने के कारण सीएम पद का मज़बूत दावेदार माना जा रहा है।

मनोज सिन्हा के पास संचार मंत्रालय की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ रेलवे राज्य मंत्री का भी अतिरिक्त प्रभार है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी में उनका कद भी तेजी से बढ़ा है। साफ सुथरी छवि के मनोज सिन्हा का भी नाम मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया जा सकता है। इस चुनाव में गाजीपुर में केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की इज्जत और साख दोनों दांव पर लगी थी जिसमें वे अव्वल नंबर से पास हुए हैं। गाजीपुर की सात विधानसभा सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है।

इस जीत के बाद से ही सोशल मीडिया पर बीजेपी की तरफ से गाजीपुर के मनोज सिन्हा को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मोदी और अमित शाह को उनपर इतना भरोसा था कि पूर्वांचल में चुनाव की जिम्मेदारी सिन्हा को ही सौंपी थी। खासतौर से गाजीपुर, मऊ, बलिया, मिर्जापुर,जौनपुर के अलावा सोनभद्र जिले में पार्टी की जीत का दारोमदार उन्हीं के कंधों पर डाल दिया गया था।  मोदी कई बार राजनैतिक और चुनावी मंच से मनोज सिन्हा की तारीफ कर चुके हैं।

मनोज सिन्हा ने आईआईटी बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की है। वो एक मजबूत पार्टी कार्यकर्ता हैं जो हमेशा लो-प्रोफाइल में रहना पसंद करते हैं। वो सांसदों के बीच काफी चर्चित हैं, साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ा नाम हैं। लेकिन मनोज सिन्हा सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूली में वो फिट नहीं बैठते क्योंकि वो भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भूमिहारों की संख्या सीमित है, ये बात उनकी सीएम दावेदारी के ख़िलाफ जा सकती है। लेकिन अगर दूसरे लिहाज़ से देखा जाए तो ये बात उनके लिए रास्ता आसान भी बना सकती है क्योंकि अगर वो मुख्यमंत्री पद का जिम्मा संभालते हैं तो उनकी छवि जाति को लेकर पक्षपात नहीं करने वाले नेता की होगी।