लखनऊ: गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनावों के लिए चुनाव प्रचार शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा. राजनीतिक दल अपने अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के मकसद से कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लोकसभा सांसद थे, जबकि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर से सांसद थे. दोनों के इस्तीफों के बाद ये सीटें रिक्त हो गई थीं. Also Read - Campaigning ends for Gorakhpur and Phoolpur LS bypolls | गोरखपुर और फूलपुर में खत्म हुआ चुनाव प्रचार, अब 11 मार्च को बैलट की लड़ाई

भाजपा के लिए गोरखपुर सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न है क्योंकि यह योगी का कर्मक्षेत्र रहा है. वह पांच बार इस सीट से लोकसभा सांसद रहे हैं. योगी से पहले उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ ने तीन बार इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. फूलपुर एक जमाने में कांग्रेस का गढ़ माना जाता था और यहीं से भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू चुनकर संसद पहुंचे थे. यहां 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार भाजपा जीती. Also Read - UP by-election: BJP announce candidates for election in Gorakhpur and Phoolpur | योगी की सीट से उपेंद्र शुक्ला होंगे बीजेपी उम्मीदवार, फूलपुर से KS पटेल मैदान में

उपचुनावों में त्रिकोणीय मुकाबले की कुछ उम्मीद नजर आती है. भाजपा के मुकाबले कांग्रेस और सपा हैं. सपा का बसपा से तालमेल हो गया है. मौर्य ने दावा किया कि गोरखपुर और फूलपुर में कमल खिलेगा. दोनों ही सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर सुधरेगा. उन्होंने दावा किया कि जहां तक वोट हिस्सेदारी की बात है तो 60 फीसदी हमारे वोट हैं जबकि बाकी अन्य में बंटेंगे.

हालांकि, मुकाबला कड़ा है क्योंकि सपा और बसपा के साथ आने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है. गोरखपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो यहां करीब साढे तीन लाख मुस्लिम, साढे चार लाख निषाद, दो लाख दलित, दो लाख यादव और डेढ लाख पासवान मतदाता हैं लेकिन बडा सवाल यह है कि सपा और बसपा का तालमेल मतदाताओं को लुभाने में कितना कामयाब हो पाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को हालांकि नकारा नहीं जा सकता.

फूलपुर के बारे में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र विभाकर शास्त्री का कहना है कि यहां की जनता को मौजूदा सरकार से विकास को लेकर जो उम्मीदें थी, वे टूट गईं. उप मुख्यमंत्री बनने से पूर्व केशव प्रसाद मौर्य ने बहुत कम अपने संसदीय क्षेत्र फूलपुर का दौरा किया, इससे भी वहां की जनता आहत है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने हालांकि फूलपुर में भाजपा की निश्चित जीत का दावा करते हुए कहा कि सपा और बसपा का गठबंधन परस्पर विरोधी विचारधारा का गठबंधन है और जनता उनके झांसे में नहीं आएगी.