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जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म करने का विधानसभा के चुनावी नतीजों पर क्या हुआ असर? जानिए यहां
2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस(NC) से गठबंधन करके कांग्रेस(INC) चुनावी मैदान में उतरी थी और इस गठबंधन का चुनावी अभियान राज्य में धारा 370 को वापस लाने की बात के इर्द-गिर्द ही घूमता दिखा और महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP का स्टैंड भी खत्म हो चुके धारा 370 को वापस लाने को लेकर था जबकि भाजपा(BJP) का चुनावी अभियान राज्य की राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ विकास की राजनीति जैसे मुद्दे पर केंद्रित रहा था पीएम मोदी ने अपने चुनावी सभाओं में अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार पर जमकर निशाना भी साधा था.
Jammu-Kashmir : जम्मू-कश्मीर में धारा 370 खत्म होने से पहले आखिरी बार 2014 में विधानसभा के चुनाव हुए थे जिसमें की किसी भी दल को स्पष्ट रूप से बहुमत नहीं मिला था . 2014 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव में कुल 87 सीटें थी जिसमें बहुमत के लिए 44 सीट की जरूरत थी , 87 सीटों में से सबसे ज्यादा 28 सीट PDP, 25 BJP,NC 15,INC 12 , JKPC 2, CPI 1 और निर्दलीयों को कुल 4 सीट मिली थी.चुनाव परिणाम के बाद BJP और PDP ने मिलकर सरकार का गठन किया था जिसके सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद बने थे और 2016 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद तो संभाला लेकिन वो गठबंधन को नहीं संभाल पाई जिसकी वजह से 2018 में BJP-PDP गठबंधन की सरकार गिर गई थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. 2024 में लगभग दस वर्षो के बाद राज्य में विधानसभा के चुनाव कराए गए.
क्या था धारा 370 में जम्मू-कश्मीर के लिए प्रावधान?
धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का तो अधिकार था लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित कानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती थी जिससे की केन्द्र सरकार को कई सारे प्रशासनिक कार्यो को राज्य में करने में कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था .धारा 370 की वजह से राज्य में कई सारे ऐसे प्रावधान थे जो कि राज्य का देश के बांकि हिस्से से अलगाव को बढ़ावा देने का काम करते थे . संविधान निर्माता और भारत के पहले कानून मंत्री बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर अनुच्छेद 370 के बहुत ज्यादा विरोधी थे यहां तक की उन्होंने इसके ड्राफ्ट को तैयार करने से भी मना कर दिया था. जम्मू-कश्मीर के उस समय के नेता शेख अब्दुल्ला आंबेडकर के मना करने के बाद जवाहर लाल नेहरू के पास पहुंचे जिसके बाद नेहरू ने एन. गोपालस्वामी अयंगर को धारा 370 के ड्राप्टिंग करने का निर्देश दिया था .
केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से खत्म किया धारा 370
इसके बाद केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले धारा 370 को खत्म कर दिया , जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को केन्द्र सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में पेश किया जिसके बाद राज्यसभा ने J&k पुनर्गठन अधिनियम 2019 को उसी दिन पारित कर दिया जिसके बाद 6 अगस्त 2019 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया और इसी दिन सदन ने अधिनियम को पारित भी कर दिया गया था. 9 अगस्त 2019 को भारत के राष्ट्रपति ने अधिनियम को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी और 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को लागू कर दिया गया था जिसके बाद बने दोनो केंद्र शासित प्रदेशों( J&Kऔर लद्दाख ) के उप-राज्यपालों को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उनके पद की शपथ दिलवाई गई थी.
इस विधानसभा चुनाव में धारा 370 पर क्या था राजनीतिक दलों का विचार
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा के चुनाव हुए थे जिसके बाद लगभग दस वर्षो के इंतजार के पश्चात राज्य में विधानसभा के चुनाव तीन चरणों में कराये गए .राज्य में विधानसभा के चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहे जिसमें की राज्य के हर समुदाय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कहीं से भी किसी भी अप्रिय घटना की कोई भी सूचना नहीं मिली .2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस (NC) से गठबंधन करके कांग्रेस (INC) चुनावी मैदान में उतरी थी और इस गठबंधन का चुनावी अभियान राज्य में धारा 370 को वापस लाने की बात के इर्द-गिर्द ही घूमता दिखा और महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP का स्टैंड भी खत्म हो चुके धारा 370 को वापस लाने को लेकर था जबकि भाजपा(BJP) का चुनावी अभियान राज्य की राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ विकास की राजनीति जैसे मुद्दे पर केंद्रित रहा था पीएम मोदी ने अपने चुनावी सभाओं में अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार पर जमकर निशाना भी साधा था.
राज्य विधानसभा 2024 के चुनाव परिणाम में घाटी की विधानसभा सीटों पर NC-INC गठबंधन ने अच्छी बढ़त बनाई है जबकि जम्मू में भाजपा ने अपनी पकड़ को और ज्यादा मजबूत किया है इस चुनाव में PDP कुछ खास नहीं कर पाई और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती भी बिजबेहड़ा सीट से चुनाव हार गई जो पार्टी का सबसे मजबूत किला था. चुनाव परिणाम के तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ये बात कही जा सकती है कि राज्य के कुछ हिस्सों में अब भी धारा 370 को लेकर एक साफ्ट कार्नर लोगों के मन में है जिसकों इस चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन भुनाने में बहुत हद तक सफल साबित हुई है.
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