पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद अब एग्जिट पोल के आंकड़े भी आ गए। आंकड़ो के हिसाब से देखें तो  यहां पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी(आप) और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होता दिख रहा है। कुछ एग्जिट पोल कांटे की लड़ाई में आप को आगे दिखा रहे हैं, तो कुछ कांग्रेस की सरकार बनने का अनुमान जता रहे हैं। इंडिया टुडे एक्सिस पोल सर्वे अनुसार कांग्रेस को 62 से 71 सीटें मिलती दिख रही हैं वहीं आम आदमी पार्टी 42 से 51 सीटों की जीत के साथ दूसरी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है।

ऐसे में यदि 11 मार्च को आने वाले नतीजे कांग्रेस के पक्ष में होते हैं तो इसके पीछे की असली वजह क्या होगी? क्या कांग्रेस के लिए सिद्धू संजीवनी साबित होंगे या फिर 10 साल से भाजपा के साथ गठबंधन में शासन कर रही शिरोमणि अकाली दल के प्रति सत्ता विरोधी लहर का फायदा कांग्रेस को मिलेगा।

टुडेज चाणक्य ने एग्जिट पोल में जहां कांग्रेस और आप को 54-54 सीटों के साथ कांटे की टक्कर में दिखाया है वहीं बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन को 9 सीटें ही मिलती हुयी दिख रही हैं। न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के अनुसार कांग्रेस और आप 55-55 सीटों के साथ कांटे की टक्कर मे हैं वहीं बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन को अधिकतम 7 सीटें मिलती हुयी दिख रही हैं।

सी-वोटर सर्वे के अनुसार कांग्रेस को 45 सीटें और आप को 63 सीटें मिलने की उम्मीद है वहीं 9 सीटों के साथ बीजेपी-अकाली गठबंधन तीसरे नंबर पर है। आपको बता दें कि पंजाब में सरकार बनाने के लिए 59 सीटों की जरूरत होती है और एग्जिट पोल के हिसाब से कांग्रेस को सत्ता मिलती दिख रही है वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि केजरीवाल ने चुनाव से पहले नवजोत सिंह सिद्धू की शर्तें मान ली होतीं तो ये आंकड़े कुछ और होते।

चुनावी मिजाज भांपने में माहिर निकले सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब चुनाव से पहले एक मास्टर स्ट्रोक लगाया था। पहले उन्होंने बीजेपी छोड़ी फिर उनके अरविंद केजरीवाल के साथ जाने की खबरे चलीं, फिर उन्होंने ‘आवाज-ए-पंजाब’ की घोषणा की। उसके बाद अंत में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। सिद्धू क्रिकेट के तो मंझे हुए खिलाड़ी थे ही इन चुनावों में उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि वे अब राजनीति के भी परिपक्व खिलाड़ी बन चुके हैं। सिद्धू के निर्णय से तो यह साफ पता चल रहा है कि जिस तरह क्रिकेट में बल्लेबाज आने वाली गेंद भांप लेता है ठीक उसी तरह सिद्धू ने भी पंजाब राजनीति की हवा पहले से ही भांप ली थी।