केंद्र सरकार के तीन बिलों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के नेताओं और केंद्र सरकार के बीच आज बुधवार को 6वें दौर वार्ता शुरू हो चुकी है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बुलावे पर करीब 40 किसान संगठनों के नेता विज्ञान भवन में केद्र सरकार से वर्ता के लिए बस में सवार होकर विज्ञान भवन पहुंच चुके हैं. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल और केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश भी विज्ञान भवन में किसान नेताओं के साथ वार्ता कर रहे हैं. Also Read - अमित शाह बोले- कृषि कानून से दोगुनी होगी आय, राकेश टिकैत ने कहा- हम आंदोलन खत्म नहीं करेंगे, किसी भी जांच से नहीं डरते

बता दें कि इस वार्ता से पहले सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई पांच दौर की बातचीत से कोई हल नहीं निकल सका था. करीब 21 दिन बाद किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच ये 6वें चरण की बातचीत शुरू हो सकी है. Also Read - Delhi NCR Traffic Alert: गणतंत्र दिवस परेड के पूर्वाभ्यास से पहले दिल्ली यातायात पुलिस ने जारी किया अलर्ट, इन रास्तों में जानें से बचें

वार्ता के लिए आए किसान नेताओं में से एक संगठन के नेता ने कहा, “हमारा रुख स्पष्ट है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए.” वहीं, वार्ता से पहले वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा है कि आज बातचीत का नतीजा निकलने की उम्मीद है. एमएसपी समेत सभी मुद्दों पर खुले मन से बात की जाएगी. उम्मीद है किसान आज आंदोलन खत्म कर देंगे.

इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा था, जो खेत कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ वार्ता के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, किसानों और सरकार के बीच आज की वार्ता के लिए गाजीपुर बॉर्डर (यूपी-दिल्ली बॉर्डर) से दिल्ली के विज्ञान भवन के लिए रवाना हो चुका है.

बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 35वां दिन है.

दरअसल, किसानों और सरकार के बीच पहले हुई 6 दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका, सरकार और किसानो के बीच आखिरी मीटिंग 8 दिसंबर को हुई थी. उसके बाद बातचीत रुक गई थी और किसानों ने विरोध तेज कर दिया था. ऐसे में सरकार ने 3 बार चिट्ठियां लिखकर किसानों को मीटिंग के लिए मनाने की कोशिश की. 21 दिन बाद अब ये किसानों और सरकार के बीच चर्चा हो रही है.

तीनों ‘काले कानून’ खत्म कर किसानों को नए साल की सौगात दे सरकार: कांग्रेस
कांग्रेस ने किसान संगठनों और सरकार के बीच नए दौर की बातचीत की पृष्ठभूमि में बुधवार को कहा कि केंद्र को तीनों ‘काले कृषि कानूनों’ को निरस्त कर किसानों को नए साल की सौगात देनी चाहिए. पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश के किसान विश्वास नहीं करते. उन्होंने प्रधानमंत्री के पूर्व के कुछ बयानों का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘हर बैंक खाते में 15 लाख रुपए और हर साल दो करोड़ नौकरियां. 50 दिन दीजिए, नहीं तो…. हम कोरोना वायरस के खिलाफ 21 दिनों में युद्ध जीतेंगे. न तो कोई हमारी सीमा में घुसा है और न किसी चौकी पर कब्जा किया है.

किसान संगठनों ने वार्ता के लिए चार मुद्दे सुझाए हैं उनमें ये शामिल हैं:-

1. तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्दध्निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि

2. सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान

3. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं.

4. किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापिस लेने (संशोधन पिछले पत्र में गलती से जरूरी बदलाव लिखा गया था) की प्रक्रिया.

सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन एक महीने से ज्यादा समय हुआ 
भारतीय किसान यूनियन के एक नेता ने बताया कि सरकार के साथ वार्ता के लिए किसान नेता सिंघु बॉर्डर से रवाना हो चुके हैं. देश की राजधानी दिल्ली और हरियाणा की सीमा स्थित सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का मुख्य धरना स्थल है. आंदोलनकारी किसान सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर 26 नवंबर से डेरा डाले हुए हैं.

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 40 किसान संगठनों के नेताओं की अगुवाई में ले आदोलन 
दिल्ली की सीमाओं पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 40 किसान संगठनों के नेताओं की अगुवाई में चले आदोलन में शामिल किसान केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं.

अब भी कड़ाके की ठंड के बीच तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान 
बता दें कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान अब भी कड़ाके की ठंड के बीच दिल्ली से लगी सीमाओं पर डटे हैं. दिल्ली से लगी सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी है सिंघू, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर सैकड़ों सुरक्षा कर्मी तैनात हैं. नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान करीब एक महीने पहले सिंघू बॉर्डर पर पहुंचे थे. दिल्ली में शीत लहर के साथ ही बुधवार को न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर सर्दी के और बढ़ने का पूर्वानुमान भी लगाया है.

तीन कृषि कानूनों को निरस्त करें और एमएसपी की देें गारंटी 
केंद्र और किसान संगठनों के बीच बुधवार को एक बार फिर बातचीत शुरू होगी. हालांकि प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि चर्चा केवल तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने पर ही होगी.

केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश क‍िए तीन ब‍िल 
इस साल सितंबर में अमल में आए तीनों कानूनों को केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश किया है. उसका कहना है कि इन कानूनों के आने से बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकेंगे.

किसान संगठन बोले- इन कानूनों से एमएसपी का सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा
दूसरी तरफ, प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि इन कानूनों से एमएसपी का सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा और मंडियां भी खत्म हो जाएंगी तथा खेती बड़े कारपोरेट समूहों के हाथ में चली जाएगी. सरकार लगातार कह रही है कि एमएसपी और मंडी प्रणाली बनी रहेगी और उसने विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया है.