उत्तराखंड विधानसभा में UCC विधेयक पेश, गूंजे 'वंदे मातरम' और 'जय श्री राम' के नारे

मंगलवार (6 फरवरी) को उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया है अगर आज उत्तराखंड में यूसीसी लागू होता है तो ये दिन केवल उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि देश के लिए यादगार बन जाएगा. वहीं आज  विधानसभा की शुरूआत होते ही 'वंदे मातरम' और 'जय श्री राम' के नारे गूंजने लगे.

Published date india.com Published: February 6, 2024 12:32 PM IST
उत्तराखंड विधानसभा में UCC विधेयक पेश, गूंजे 'वंदे मातरम' और 'जय श्री राम' के नारे

Uttarakhand UCC Bill: आज (6 फरवरी) को उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने देहरादून में राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता  विधेयक पेश कर दिया है.  जैसे ही विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया तभी सदन के अंदर विधायकों ने वंदे मातरम और जय श्री राम के नारे लगाने शुरू कर दिए. आज का दिन पूरे देश के लिए इतिहासिक बन गया है.

सदन में लगे ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे

सीएम धामी ने राज्य विधानसभा में जैसे ही समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया तभी वहां उपस्थित सभी विधायकों ने  ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए जिसके बादग सदन को 2 बजे तक के लिए स्थगित भी कर दिया गया.

आपको बता दें कि यूसीसी कार्यालय में समिति के सदस्यों ने दिन रात एक करके इस यूसीसी ड्राफ्ट को तैयार किया है. ऐसा माना जा रहा है कि यूसीसी में 400 से अधिक धाराएं शामिल होंगी. यूसीसी विधेयक का सीधे तौर पर लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से उत्पन्न होने वाली विसंगतियों को समाप्त करना है. ये कुछ प्रावधान हैं जो UCC में दिख सकते हैं-

  • समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लग सकती है.
  • लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल की जा सकती है.
  • लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों का पुलिस में रजिस्ट्रेशन जरूरी किया जा सकता है.
  • विवाह के बाद पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया जा सकता है.
  • मुस्लिम धर्म की महिलाओं को बच्चा गोद लेने का अधिकार दिया जा सकता है और गोद लेने की प्रक्रिया सरल की जा सकती है.
  • राज्य की सभी लड़कियों का माता-पिता की विरासत पर लड़कों के बराबर अधिकार दिए जा सकते हैं.
  • मुस्लिम धर्म के भीतर इद्दत जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
  • पति और पत्नी दोनों को तलाक की प्रक्रियाओं तक समान पहुंच प्राप्त होगी.
  • नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु होने के बाद बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी और उसे मुआवजा दिया जाएगा.
  • अगर पत्नी की मृत्यु हो जाती है और उसके माता-पिता को कोई सहारा नहीं है, तो उनकी देखरेख की जिम्मेदारी पति को सौंपी जाएगी.
  • पति-पत्नी के बीच झगड़े के मामलों में बच्चों की कस्टडी उनके दादा-दादी को दी जाएगी.
  • जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रावधान पेश किए जा सकते हैं.
  • आदिवासियों समुदायों को यूसीसी से छूट मिलने की संभावना जताई जा रही है.

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