नई दिल्ली: एक रिपोट के अनुसार भारतीय मोबाइल ग्राहक पांचवीं पीढ़ी की (5जी) सेवाओं की शुरुआत 2022 तक होने की उम्मीद कर सकते हैं. वहीं देश में 4 जी कनेक्शनों की संख्या लगभग चार गुना होने का अनुमान है. एरिक्सन मोबिलिटी रपट (ईएमआर) में यह निष्कर्ष निकाला है. ईएमआर के संपादक पेट्रिक केरवाल ने रपट की जानकारी देते हुए कहा,‘ हमें उम्मीद है कि 5 जी स्मार्टफोन ग्राहकों को 2022 तक उपलब्ध होगी. 2023 तक भारत में 5 जी ग्राहकी संख्य एक करोड़ के आसपास होने की उम्मीद है. रपट के अनुसार 5 जी की वाणिज्यिक स्तर पर शुरुआत इस साल 2018 के आखिर तक हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस प्रौद्योगिकी की उच्च ग्राहकी वाले बड़े देशों में चीन, जापान व दक्षिण कोरिया होंगे.

मोबाइल पर बात करना हुआ सस्ता
दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा का कहना है कि दूरसंचार क्षेत्र में बीते चार साल में सरकार की सक्रिय नीति के चलते मोबाइल पर बात करना बहुत सस्ता हो गया है. फोन काल के बार-बार कटने (कॉल ड्राप) की समस्या भी कम हुई है.उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र की इस ‘सफल गाथा’ को जारी रखने के लिए केंद्र सरकार और कड़े फैसले करने से नहीं हिचकेगी. इसके साथ ही सिन्हा ने इस क्षेत्र में नौकरियां समाप्त होने संबंधी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि दूरसंचार में नए अवसरों से नए रोजगार सृजित हुए हैं. उन्होंने इस क्षेत्र में विलय व अधिग्रहण को वैश्विक घटनाक्रम करार दिया.

बीएसएनएल और एमटीएनएल का किया बचाव
इसके साथ ही मंत्री ने सार्वजनिक दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल व एमटीएनएल का खुलकर बचाव किया. उन्होंने कहा कि ये दोनों कंपनियां अपनी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं भले ही उनके पास इस कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले बाजार में 4 जी स्पेक्ट्रम नहीं है. दूरसंचार क्षेत्र की वित्तीय दिक्कतों के बारे में पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा,‘ दूरसंचार क्षेत्र एक सफल गाथा रहा है और हम सुनिश्चित करेंगे कि (सफलता का) यह क्रम बना रहे. चाहे ब्याज दरें हो या विलंबित स्पेक्ट्रम भुगतान … हमने कदम उठाए हैं. भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर इस तरह के कदम उठाए जाएंगे.

भारत अपवाद नहीं
अपनी सरकार की चार साल की उपलब्धियों का ब्यौरा देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कंपनियों के विलय के संदर्भ में सिन्हा ने कहा कि दुनिया भर के सबसे विकसित दूरसंचार बाजारों में केवल 3-5 कंपनियां ही काम कर रही हैं और भारत इसका अपवाद नहीं है. उन्होंने कहा,‘ सुदृढ़ीकरण ( विलय व अधिग्रहण) एक वैश्विक परिघटना है और भारत भी इसी का हिस्सा है. सिन्हा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जबकि देश का दूरसंचार क्षेत्र वित्तीय बोझ से दबा है. इस उद्योग पर अनुमानत : 7.6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बोझ है.