AI के बढ़ते इस्तेमाल ने बढ़ाया खर्च, दिग्गज कंपनी को लगा 4200 करोड़ का झटका

AI Usage Bill: एआई से काम आसान हुआ, लेकिन बढ़ता खर्च कंपनियों की चिंता बन गया. जानिए कैसे AI टूल्स पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं और कंपनियां अब नई रणनीति बना रही हैं.

Written by: Rishabh Kumar
Published: May 29, 2026, 10:58 PM IST

AI Usage Bill: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पिछले कुछ सालों में टेक दुनिया में बड़ा उत्साह देखने को मिला है. कई कंपनियों ने दावा किया कि AI की मदद से कम कर्मचारियों में ज्यादा काम किया जा सकता है. इसी सोच के चलते कई जगहों पर कर्मचारियों की संख्या भी कम की गई. लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है. जिन कंपनियों को लग रहा था कि AI से खर्च घट जाएगा, वे अब इसके भारी बिल देखकर हैरान हैं. AI से काम जरूर तेज हो रहा है, लेकिन इसका इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, लागत भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है.

Microsoft से Uber तक बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के अनुसार कई बड़ी टेक कंपनियां AI पर होने वाले खर्च को लेकर चिंता में हैं. Uber के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि AI का उपयोग काफी महंगा साबित हो रहा है. वहीं Microsoft ने भी Anthropic Claude के कई सब्सक्रिप्शन कम करने का फैसला लिया है. बताया जा रहा है कि इसकी मुख्य वजह बढ़ती लागत है. एक रिपोर्ट के मुताबिक एक कंपनी ने केवल एक महीने में लगभग 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4200 करोड़ रुपये AI टूल्स पर खर्च कर दिए. इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद कंपनी के अंदर भी चिंता बढ़ गई.

आखिर इतना ज्यादा खर्च कैसे हुआ?

शुरुआत में कंपनियों ने कर्मचारियों को AI इस्तेमाल करने की पूरी छूट दे दी. इससे काम की गति बढ़ी और उत्पादकता में भी सुधार दिखा. लेकिन कई कंपनियां यह तय नहीं कर पाईं कि AI का इस्तेमाल कितना और किस सीमा तक होना चाहिए. नतीजा यह हुआ कि कर्मचारी हर छोटे-बड़े काम के लिए AI का उपयोग करने लगे. कोडिंग, रिपोर्ट तैयार करना, दस्तावेजों का विश्लेषण और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम लगातार AI से कराए जाने लगे. जैसे-जैसे उपयोग बढ़ा, वैसे-वैसे खर्च भी तेजी से बढ़ता गया.

AI इतना महंगा क्यों पड़ता है?

AI कंपनियां आमतौर पर क्रेडिट या टोकन सिस्टम पर काम करती हैं. जितना ज्यादा डेटा प्रोसेस होगा और जितने बड़े काम AI से कराए जाएंगे, उतने ज्यादा क्रेडिट खर्च होंगे. छोटी क्वेरी पर लागत कम आती है, लेकिन बड़ी फाइलें, लंबे दस्तावेज और जटिल कोडिंग कार्य काफी महंगे साबित होते हैं. AI कई बार एक ही काम को पूरा करने के लिए बार-बार प्रोसेस चलाता है, गलतियां ढूंढता है और उन्हें सुधारता भी है. इस पूरी प्रक्रिया में काफी कंप्यूटिंग शक्ति लगती है, जिसका सीधा असर बिल पर पड़ता है.

अब कंपनियां बदल रही हैं रणनीति

इस अनुभव के बाद कई कंपनियां AI उपयोग को लेकर नए नियम बना रही हैं. अब कर्मचारियों के लिए उपयोग की सीमा तय की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि कौन किस काम के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है. कुछ कंपनियां महंगे AI मॉडल की जगह सस्ते विकल्प भी तलाश रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि AI भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक है, लेकिन इसका उपयोग सही योजना और निगरानी के साथ करना जरूरी है. बिना नियंत्रण के इस्तेमाल करने पर यह लागत कम करने की बजाय कंपनियों के लिए बड़ा वित्तीय बोझ बन सकता है.

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