5G के लिए कराया रिचार्ज...महीनों तक नहीं मिला नेटवर्क; कंपनी को लौटाने पड़े 592 की जगह 5000 रुपये

Airtel 5G: शिमला उपभोक्ता आयोग ने 5G सेवा नहीं मिलने पर एयरटेल को रिचार्ज राशि लौटाने और ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया. मामला लंबे समय तक इंटरनेट समस्या से जुड़ा है.

Written by: Rishabh Kumar
Published: June 14, 2026, 4:16 PM IST

Airtel 5G: शिमला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयरटेल के एक ग्राहक के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने भारती एयरटेल को ग्राहक अरुण जरयाल को 592.32 रुपये की रिचार्ज राशि लौटाने और 5,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. ग्राहक का कहना था कि उसने 5G सेवा के लिए भुगतान किया था, लेकिन उसके मोबाइल में लगातार केवल “E” यानी एज सिग्नल ही दिखाई देता रहा. आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद ग्राहक की शिकायत को सही माना.

लंबे समय से इंटरनेट की समस्या

शिकायत के अनुसार, अरुण जरयाल एयरटेल के पोस्टपेड ग्राहक थे. जून 2024 से उन्हें इंटरनेट सेवा में परेशानी आ रही थी. उन्होंने कई बार कंपनी से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई. कंपनी ने कुछ कोशिशें कीं, लेकिन समस्या का हल नहीं निकला. बाद में जुलाई 2024 में उन्होंने पोस्टपेड से प्रीपेड प्लान में बदलाव किया और 592.32 रुपये का रिचार्ज कराया. इसके बावजूद 5G सेवा शुरू नहीं हुई और फोन में लगातार “E” सिग्नल ही आता रहा.

ग्राहक ने कई बार की शिकायत

ग्राहक का कहना था कि उन्होंने कई बार कस्टमर केयर, ई-मेल और फोन कॉल के जरिए कंपनी से संपर्क किया. हर बार उन्हें भरोसा दिया गया कि समस्या जल्द ठीक कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने स्थानीय कार्यालय से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली. इसी वजह से उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और कंपनी पर सेवा में कमी का आरोप लगाया.

एयरटेल ने क्या दलील दी?

एयरटेल की ओर से पेश वकील ने आयोग को बताया कि ग्राहक का आरोप गलत है. कंपनी का कहना था कि शिकायतकर्ता Xiaomi Redmi Note 9 Pro Max फोन इस्तेमाल कर रहे थे, जो केवल 4G डिवाइस है. कंपनी के अनुसार, इस फोन में 5G चलाने के लिए जरूरी हार्डवेयर नहीं है. एयरटेल ने यह भी कहा कि मोबाइल में किसी तरह की तकनीकी खराबी या सॉफ्टवेयर समस्या होने पर नेटवर्क प्रभावित हो सकता है, जिसके लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है.

आयोग ने कंपनी की दलील पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी ने कहीं भी यह नहीं बताया कि उसने ग्राहक के मोबाइल फोन की व्यक्तिगत रूप से जांच की थी. आयोग ने कहा कि अगर कंपनी को पहले से पता था कि ग्राहक का फोन 5G के लिए उपयुक्त नहीं है, तो उसे 5G सेवा वाला रिचार्ज करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी. साथ ही जब कंपनी को इस बारे में जानकारी मिली, तब रिचार्ज की राशि वापस की जानी चाहिए थी.

ग्राहक के पक्ष में आया फैसला

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ग्राहक ने भुगतान करने के बाद भी वादा की गई सेवा का लाभ नहीं लिया. ऐसे में ग्राहक को नुकसान हुआ है. इसी आधार पर एयरटेल को 592.32 रुपये की रिचार्ज राशि लौटाने और 5,000 रुपये मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया गया. यह फैसला उन मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए भी अहम माना जा रहा है, जो नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं.

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