सैन फ्रांसिस्को: चाइल्ड पोर्नोग्राफी(Child Pornography) को रोकना इन दिनों हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बड़ा टास्क साबित होता जा रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे फैलाने वाले लोग वाट्सएप(Whatsapp) का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते हैं. टेकक्रंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पर्याप्त मानव मध्यस्थों(ह्यूमन मोडरेटर्स) के अभाव में, वाट्सऐप पर इस तरह का कंटेंट काफी शेयर किया जा रहा है.

इजरायल के दो एनजीओ स्क्रीन सेवर्स और नेटीवेई रेशे की रिपोर्ट के अनुसार, वाट्सएप ग्रुप को खोजने के लिए थर्ड पार्टी एप चाइल्ड प्रोर्नोग्राफी कंटेंट को बढ़ाने वाले यूजर्स के साथ जुड़ने के लिए निमंत्रण लिंक की पेशकश करते हैं. उत्पीड़न-रोधी स्टार्टअप एंटी टॉक्सिन के अनुसार, टेकक्रंच ने अपनी जांच में पाया कि इनमें से कई समूह मौजूदा समय में एक्टिव हैं. इनमें से कुछ ग्रुप तो अपने काम को छुपाते भी नहीं.

टेकक्रंच की जांच के अनुसार, फेसबुक को वाट्सएप पर इस तरह के कंटेंट को फैलने से बचाने की कोशिश करते हुए देखा गया. रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी उपायों के बिना ही, जिसकी इनक्रिप्शन को कमजोर करने के लिए जरूरत होगी, वाट्सएप मध्यस्थों को इन समूहों को खोज निकालने और इनमें रोक लगाने के लिए सक्षम होना चाहिए. इस तरह के कंटेंट को इसलिए भी बढ़ावा मिल रहा है क्योंकि वॉट्सएप अपने यूजर्स को एंड-टू-एंड इंक्रीप्शन प्रदान करता है.

चाइल्ड पार्नोग्राफी ही एकमात्र समस्या नहीं है, जिससे यह मैसेजिंग एप जूझ रहा है. भारत जैसे देश में वाट्सएप का इस्तेमाल अफवाहों को फैलाने के लिए भी किया जाता है, जिसके कारण कई लोगों को पीट-पीटकर मार दिया गया.