
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और खबरों की दुनिया में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. ऋषभ टेक और Off-Beat से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी रखते ... और पढ़ें
CNAP Vs Truecaller: भारत में कॉलर की पहचान को लेकर बड़ा बदलाव शुरू हो गया है. TRAI ने CNAP यानी कॉलर नेम प्रेजेंटेशन सिस्टम शुरू किया है. इसके तहत जब आपके फोन पर कोई कॉल आएगी, तो कॉल करने वाले का नाम अपने आप स्क्रीन पर दिखेगा. इसके लिए न तो कोई ऐप डाउनलोड करना होगा और न ही किसी तरह का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेग. CNAP टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद KYC रिकॉर्ड पर काम करता है. जब कोई व्यक्ति सिम कार्ड लेता है, तो वह अपने दस्तावेज जमा करता है. उन्हीं दस्तावेजों में दर्ज नाम को नेटवर्क कॉल के साथ दिखा देता है. यानी नाम सीधे टेलीकॉम सिस्टम से आता है, किसी थर्ड-पार्टी ऐप से नहीं. फिलहाल इसे 4G और 5G नेटवर्क पर धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है और आगे चलकर पुराने नेटवर्क पर भी लाया जाएगा.
CNAP लाने का मुख्य उद्देश्य फर्जी कॉल, गलत नाम और धोखाधड़ी से बचाव करना है. कई बार अनजान नंबर से कॉल आती है और यूज़र समझ नहीं पाता कि कॉल कौन कर रहा है. CNAP से कम से कम कॉल करने वाले का रजिस्टर्ड नाम सामने आ जाएगा. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नेटवर्क लेवल पर काम करता है. इसके लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होती. साथ ही, TRAI ने यूजर्स को यह सुविधा भी दी है कि अगर वे अपना नाम दिखाना नहीं चाहते, तो CLIR सेटिंग के जरिए इस फीचर को बंद कर सकते हैं. टेलीकॉम कंपनियों और मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने डिवाइस को CNAP के लिए तैयार करें. उम्मीद है कि 2026 तक यह सुविधा बड़े स्तर पर उपलब्ध हो जाएगी.
Truecaller एक लोकप्रिय कॉलर आईडी और स्पैम कॉल पहचानने वाला ऐप है. यह Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है. Truecaller सिर्फ नाम दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कॉल को स्पैम, फ्रॉड, बिजनेस या पर्सनल जैसी कैटेगरी में भी दिखाता है. इसका डेटाबेस यूज़र्स की कम्युनिटी से मिलता है। यानी लोग खुद नंबरों के बारे में जानकारी जोड़ते हैं, जिससे ऐप समय के साथ और ज्यादा स्मार्ट बन जाता है. Truecaller में कॉल ब्लॉकिंग, स्पैम अलर्ट, बिजनेस जानकारी, कॉल का कारण बताने वाला फीचर और वॉइसमेल जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. हालांकि, इसके लिए ऐप इंस्टॉल करना, इंटरनेट का इस्तेमाल और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है.
CNAP और Truecaller के बीच सबसे बड़ा फर्क डेटा के स्रोत का है. CNAP पूरी तरह टेलीकॉम कंपनियों के KYC-वेरीफाइड रिकॉर्ड पर निर्भर करता है. वहीं Truecaller यूज़र द्वारा दी गई जानकारी और कम्युनिटी डेटा से काम करता है. CNAP बिना इंटरनेट और बिना ऐप के काम करता है, जबकि Truecaller को इस्तेमाल करने के लिए ऐप इंस्टॉल करना और समय-समय पर अपडेट करना पड़ता है. फीचर्स के मामले में भी अंतर है. CNAP सिर्फ कॉलर का रजिस्टर्ड नाम दिखाता है, जबकि Truecaller स्पैम कॉल पहचानने, ब्लॉक करने और धोखाधड़ी से अलर्ट देने जैसे एडवांस फीचर देता है.
अगर आप प्राइवेसी को ज्यादा महत्व देते हैं और बिना किसी ऐप के सिर्फ कॉल करने वाले का आधिकारिक नाम देखना चाहते हैं, तो CNAP आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. यह सरल है और सीधे नेटवर्क पर काम करता है. वहीं, अगर आप रोजाना स्पैम और फ्रॉड कॉल से परेशान रहते हैं और ज्यादा सुविधाओं के लिए ऐप को परमिशन देने में दिक्कत नहीं है, तो Truecaller आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा.
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