नई दिल्ली: दुनियाभर में फेसबुक यूजर्स के डाटा लीक पर बीजेपी और कांग्रेस में तल्खी बढ़ती जा रही है. वहीं दूसरी ओर डाटा चोरी से लोगों में डर भी बना हुआ है. आपको बता दें कि तमाम देशों में डाटा संरक्षण को लेकर कानून हैं, लेकिन भारत में इसे लेकर अब तक कोई कानून नहीं बन पाया है. इस मुद्दे पर पहले भी कई बार विचार किया जा चुका है, लेकिन इस बार हालात काफी संजीदा नजर आ रहे हैं. हालांकि इसके लिए आईटी एक्ट की धारा 43ए के तहत डाटा संरक्षण के लिए उचित दिशा निर्देश हैं, लेकिन व्यवहारिक तौर पर ये काफी कमजोर नजर आते हैं.

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सरकार का कहना है कि वो व्यक्तिगत डाटा को समुचित संरक्षण देने के लिए एक नया डाटा संरक्षण कानून बनाने जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय (MET) इस पर काम कर रहा है. इसके लिए न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्णा समिति एक रिपोर्ट तैयार कर रही है जो दो महीने में आ सकती है. जानकारी के मुताबिक ये कानून ऐसा होगा जो अन्य देशों के लिए मानक (Standard norms) का काम करेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि सबकुछ ठीक रहा तो सालभर के अंत तक डाटा प्रोटेक्शन का मजबूत कानून आ जाएगा. इसके अलावा यह भी कहा गया कि श्रीकृष्णा समिति भारत में निजता (प्राइवेसी) की परिभाषा भी तय करेगी.

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नए कानून के आने के बाद तमाम सोशल साइट्स का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के मन में उनके डाटा के गलत इस्तेमाल होने का डर नहीं होगा. हालांकि इससे पहले भी डाटा या इस प्रकार के कानून के बनाने की मांग उठ चुकी है, लेकिन यह काम इसे सफलता नहीं मिल सकी. खबरों की मानें तो यह कानून सोशल साइट्स पर ही नहीं, बल्कि किसी भी इलैक्ट्रॉनिक माध्यम में इस्तेमाल होने वाले ग्राहकों से जुड़ी जानकारी को भी सुरक्षा मिलसकेगी.

सरल भाषा में समझा जाए तो ये कानून संचार कंपनियों पर भी लागू होगा. इस कानून के बन जाने के बाद फोन कंपनियां ग्राहकों से जुड़ी सूचना किसी दूसरी एजेंसी को नहीं दे पाएंगी. इसके अलावा यह कानून गूगल के जी-मेल एवं याहू जैसी ई-मेल कंपनियों पर भी लागू होगा. सरकार का मानना है कि भारतीय में जिस तेजी से डिजिटाइजेशन हो रहा है उसे देखते इस कानून की जरुरत समय की डिमांड साबित हो रहा है.