भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जब चंद्रयान 2 में अंतरिक्ष यान के विक्रम को चंद्रमा पर उतारने की कोशिश कर रहा था, उस संगठन पर कथित तौर पर उत्तर कोरियाई हैकरों ने हमला किया था। Daily Mail की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इसरो उनके हमले के दौरान आने वाली पांच सरकारी एजेंसियों में से एक थी। हालांकि, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि हमले ने चंद्रमा मिशन को प्रभावित किया।
कथित तौर पर ISRO के कर्मचारियों ने उत्तर कोरियाई स्पैमर से फिशिंग ईमेल खोलने के बाद गलती से अपने सिस्टम पर मैलवेयर स्थापित कर दिया। Financial Times की एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि सितंबर में इसरो को हमले के बारे में सूचित किया गया था।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह हमला जाहिरा तौर पर DTrack का उपयोग करके किया गया था, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह उत्तर कोरिया सरकार द्वारा नियंत्रित लाजर समूह से जुड़ा हुआ है। 18 भारतीय राज्यों में वित्तीय संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों में साइबर सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्की की एक रिपोर्ट में मालवेयर का पता चला है। ऐसा ही माना जाता है कि कुडनकुलम परमाणु संयंत्र भी ऐसे ही मालवेयर से प्रभावित हुआ था।

इससे पहले आपको बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के चंद्रयान 2 (Chandrayaan-2) के लेंडर विक्रम ने चंद्रमा पर हार्ड लैंडिंग की थी। यह दावा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने किया था। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने ‘लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर कैमरा’ से ली गईं उस क्षेत्र की ‘हाई रेजोल्यूशन’ तस्वीरें शुक्रवार को जारी कीं जहां भारत ने अपने महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान दो’ मिशन के तहत लैंडर विक्रम की ‘सॉफ्ट लैंडिग’ कराने की कोशिश की थी। नासा ने इन तस्वीरों के आधार पर बताया कि विक्रम की ‘हार्ड लैंडिंग’ हुई।