भारतीय सेना ने अपने ऑफिसर्स को उनके फेसबुक अकाउंट को डिलिट करने को कहा है। इतना ही नहीं, सेना ने ऑफिसर्स को उनके व्हाट्सएप अकाउंट तक को भी ना इस्तेमाल करने की डिमांड कर दी है। बता दें कि कुछ हफ्तों पहले एडवाइजरी बोर्ड ने ऑफिसर्स को चेतावनी दी थी कि वें संवेदनशील पोस्ट करने से बचें। इसके पीछे का कारण इस पॉप्युलर मैसेजिंग ऐप का सेंसिटिव होना है। इसलिए सेना का कहना है कि इसे किसी प्रकार के ऑफिशियल बाच चीत के लिए इस्तेमाल ना किया जाए। यह फैसला पिछले महीने सामने आए Pegasus-WhatsApp जासूसी विवाद के सामने आने के बाद लिया गया है।

यदि आपको इस विवाद के बारे में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है तो बता दें कि हाल ही में NSO ग्रुप Pegasus को व्हाट्सएप वीडियो कॉलिंग फीचर के लिए एक स्पाईवेयर देने के लिए शक के घेरे में आया था। एक WhatsApp प्रवक्ता ने कंफर्म भी किया है कि NSO ग्रुप Pegasus के जरिए भारतीयों को मॉनिटर कर रहा है।

इनमें दो दर्जन से ज्यादा वकील, पत्रकार और दलित two dozen academics, lawyers, journalists, and Dalit कार्यकर्ता शामिल हैं। WhatsApp ने अपनी सफाई में बताया है कि ये सभी लोग दो हफ्तों से clarified that these victims were under निगरानी में बने हुए थे, जिसके बाद Facebook ने इसका पता लगा लिया था।

Pegasus spyware अटैकर्स को प्राइवेट डाटा का एक्सेस लेने में मदद करता है। इस डाटा में यूजर के पासवर्ड्स, कॉन्टेक्ट, कलेंडर इवेंट्स, टेक्स्ट मैसेज और लाइव वॉइस कॉल आदि शामिल होता है। इस मुद्दे पर The Print की एक रिपोर्ट कहती है कि सेना के साइबर ग्रुप ने सोशल मीडिया ट्रेंड को एनालाइज किया है। इसमें सेना ने आर्मी ऑफिसर्स द्वारा इंटरनेट इस्तेमाल करने के एक नए तरीके का पता लगाया। सेना ने अपने ऑफिसर्स को कहा है कि भले ही व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन इस्तेमाल करता हो, लेकिन यदि एक कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस हैक या अटैक होता है, तो यह प्रोटेक्शन काम नहीं आती है।