भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में चाइनीज कंपनियां पैर पसारे हुई हैं। इसमें Xiaomi, Oppo, Vivo और Realme जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों की दौड़ में एक और चाइनीज कंपनी Infinix तेजी शामिल हो रही है। कंपनी भारत में अपने भविष्य को लेकर काफी आशान्वित है और लगातार ट्रेंडिंग फीचर्स के साथ नए-नए स्मार्टफोन लॉन्च कर रहा है। कंपनी ने भारत में ‘मेड इन इंडिया’ के तहत अपने स्मार्टफोन्स का प्रोडक्शन कर रही है। कंपनी का दावा है कि वह अपने ग्राहकों के हाथ में स्मार्टफोन पहुंचने से पहले कई सारी क्वालिटी चैक करती है ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की शिकायत न हो। इन्हीं क्वालिटी चैक पर कंपनी ने नोएडा स्थित अपनी फैक्ट्री में मीडिया कर्मियों को बुलाया था जिसमें कंपनी ने Infinix स्मार्टफोन की मैन्यूफैक्चरिंग प्रोसेस से मीडिया कर्मियों को रू-ब-रू करवाया।

चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी भारत में अपने स्मार्टफोन की 100 परसेंट मैन्यूफैक्चरिंग नहीं करती है, बल्कि फोन पार्ट्स की एसेम्बलिंग करती है। कंपनी अपने फोन में लगने वाले सभी पार्ट्स इंपोर्ट करती है और उन्हें नोएडा स्थित अपनी फैक्ट्री में एसेम्बल करती है।लेकिन इस दौरान वह हर एक स्टेप को काफी सावधानी और डबल क्वालिटी चैक करते हुए आगे बढ़ती है। कंपनी हर स्टेप पर क्वालिटी चैक ह्यूमन और मशीन दोनों तरीके से करती है ताकि उसके ग्राहकों तक जब स्मार्टफोन पहुंचे तो उन्हें किसी प्रकार की निराशा न हो।

स्मार्टफोन की मैन्यूमैक्चरिंग प्रोसेस मदरबोर्ड की एसेम्बलिंग से शुरू होती है जिसमें पीवीबी (Printed circuit board) में विभिन्न कॉम्पोनेट्स जैसे सिम स्लॉट, मैमोरी कार्ड स्लॉट, चिपसेट, स्टोरेज, कई सारी आईसी, रेजिस्टेंट और दूसरे पार्ट की सोल्डरिंग से शुरू होती है जो कि पूरी तरह मशीन से किया जाता है जिसके बाद मशीन और कंपनी के स्टाफ द्वारा कई चरणों में चैक किया जाता है कि कहीं किसी प्रकार की कमी न रह जाए। पीसीबी सर्किट में सभी जरूरी कॉम्पोनेट्स लगाने और चैकिंग के बाद सोल्डरिंग की जांच के लिए एक्स-रे के जरिए बोर्ड्स की जांच की जाती है, जिसके बाद ही इन्हें आगे के लिए भेजा जाता है।

एक बार पीसीबी बोर्ड में सोल्डरिंग और उसकी चैकिंग का काम पूरा होने के बाद इसमें सॉफ्टवेयर इंस्टॉलिंग का काम शुरू होता है। इसके बाद यहीं पर सॉफ्टवेयर चैकिंग होती जिसमें कैमरा, कॉलिंग और कुछ जरूरी टेस्टिंग की जाती है। मदरबोर्ड में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए जाने के बाद स्मार्टफोन के असेंबलिंग का काम शुरू होता है। इसके बाद एसेम्बलिंग चैन में फोन में बैक पैनल, स्क्रीन, फ्रंट कैमरा, बैक कैमरा और बैटरी फिट किया जाता है।इनफिनिक्स के स्किल्ड स्टाफ हर स्टेप के बाद इसे चैक करते है और एक प्रतिशत की खामी मिलने पर फोन को रिजेक्ट करते हुए एसेम्बली चैन से अलग कर देते हैं।

स्मार्टफोन की कंपलीट एसेम्बलिंग के बाद फोन का वायब्रेशन टेस्टिंग के गुजारा जाता है। इसके बाद फोन को 48 घंटे को ऑटोमेटिक यूज किया जाता है। यहां से कुछ सैम्पल स्मार्टफोन को ड्रॉप और टेम्प्रेचर टेस्ट की प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ा है। इस टेस्ट में फेल होने पर उस बैच के सभी फोन रिजेक्ट कर दिए जाते हैं।फोन की सभी टेस्टिंग होने के बाद फोन फिर से पैकिंग के लिए एसेम्बलिंग लाइन में आता है। लेकिन तमाम क्वॉलिटी चैक के बाद एक बार फिर स्मार्टफोन को फिर से मैन्यूअली इंफिनिक्स के स्टाफ द्वारा चैक किया जाता है। पैकिंग से पहले ये चैकिंग काफी अहम होती है इसलिए कंपनी तमाम स्टेप के बाद फोन की मैन्यूअल और मशीन दोनों से चैकिंग करती है। फैक्ट्री विजिट के दौरान ये बात गौर करने की रही कि कंपनी का ध्यान क्वालिटी चैक पर था।

बता दें कि कंपनी इस साल एक के बाद एक स्मार्टफोन लॉन्च कर चुकी है, जिसमें ट्रिपल कैमरा सेटअप वाले Infinix Smart 3 Plus और Infinix S4 स्मार्टफोन और क्वार्ड कैमर (ड्यूल फ्रंट+ ड्यूल बैक) वाला Infinix Hot 7 Pro और Infinix Hot 7 स्मार्टफोन शामिल हैं। इसके साथ ही कंपनी जल्द ही मार्केट में वियरेबल डिवाइस फिटबेंड और हेडफोन भी लॉन्च करने की तैयारी में है। हालांक कंपनी अपना फिटनेस बेंड भारत में पेश कर चुकी है।