नई दिल्ली|  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दक्षिण एशिया संचार उपग्रह जीएसएटी-9 के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती (काउंट डाउन) शुरू कर दिया है. इस उपग्रह का उद्देश्य दक्षिण एशिया क्षेत्र के देशों के बीच सूचनाएं उपलब्ध कराना और आपदा प्रबंधन को मजबूत करना है.

इस भूस्थिर संचार उपग्रह को इसरो ने बनाया है. इसको श्रीहरिकोट में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण किया जाएगा. आठ दक्षेस देशों में से सात देश इस परियोजना का हिस्सा हैं. पाकिस्तान ने यह कहते हुए इससे बाहर रहने का फैसला किया कि उसका अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है.

इसरो के जीएसएलवी-एफ09 रॉकेट से इस उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा. 235 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मिशन का जीवनकाल 12 साल का है. साथ ही इस उपग्रह से प्रत्येक देश को डीटीएच, वीसैट क्षमता और आपदा सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा.

इसरो चेयरमैन ए एस किरन कुमार ने कहा सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं. मई 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों से दक्षेस उपग्रह बनाने के लिए कहा था जो पड़ोसी देशों को भारत की ओर से उपहार के तौर पर दिया जा सके.

बीते रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मोदी ने घोषणा की थी कि दक्षिण एशिया उपग्रह अपने पड़ोसी देशों को भारत की ओर से कीमती उपहार होगा. मोदी ने कहा था कि पांच मई को भारत दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा.

इस परियोजना में भाग लेने वाले देशों की विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने में इस उपग्रह के फायदे लंबा रास्ता तय करेंगे. बड़े प्रक्षेपणों के बारे में एक सवाल पर कुमार ने कहा कि इसरो अगले साल की शुरूआत में चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण करेगा. इससे पहले संचार उपग्रह जीएसएटी-8 का 21 मई 2011 को फ्रेंच गुएना के कोउरो से प्रक्षेपण किया गया था.