पिछले कुछ समय से ISRO अपने DSN (डीप स्पेस नेटवर्क) के जरिए चंद्रमा के करीब Chandrayaan 2 मून लैंडर विक्रम तक सिग्नल भेजने और संपर्क स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रहा है। वहीं कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) भी मून लैंडर विक्रम तक सिग्नल भेजने के लिए ISRO की मदद कर रही है। अब लेटेस्ट रिपोर्ट सामने आई है, जहां पता चला है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) विक्रम लैंडर के असफल होने के कारणों की जांच करेगा।

स्पेस एजेंसी ISRO अब इस बात का पता लगाने का प्रयत्न करेगी कि ऐसा क्या गलत हुआ और क्या ऐसा मान लिया गया था कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर भेजा गया Chandrayaan 2 मिशन का लैंडर वहां उतर नहीं सका। इसरो के एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

इससे पहले, 7 सितंबर को विक्रम लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर सॉफ्ट लैंडिग करनी थी। इससे पहले की वह यह कर पाता उसने नियंत्रण खो दिया और वहां उसने क्रैश लैंडिग की। सेवानिवृत्त अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “इसरो को प्राप्त डेटा से सभी पहलुओं की जांच करनी होगी। उन्हें इस बात का भी पता लगाना चाहिए कि ऐसा क्या हुआ था जो नहीं किया गया और उसके बिना ही परिणाम की कल्पना कर ली गई।”

उनके अनुसार, इसरो को देखना है कि लॉन्च से पहले किसी भी सिमुलेशन को क्या अनदेखा किया गया या फिर किसी ज्ञात विचलन को माफ कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा, “इसरो को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि विभिन्न विफलता पहलुओं की किस सीमा तक जांच की गई थी। इसरो को इसकी तह तक जाना होगा। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए इस प्रकार की जांच में काफी समय लगेगा।”